प्रवेश देने वाले निजी स्कूल्स को शिक्षा विभाग नहीं देगा किसी भी तरह का भुगतान
अगले सप्ताह से आरटीई के अंतर्गत वर्तमान सत्र 2022 – 23 के लिए प्री प्राईमरी कक्षाओं के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी मिली है। सरकार को यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में करना पड़ रहा है। जिस तरह से इस प्रक्रिया को लागू किया जा रहा है, निश्चित रूप से उसे भी कोर्ट में चुनौती मिलनी तय है। मिली जानकारी के मुताबिक पी पी – 3, पी पी – 4 एवं पी पी – 5 के लिए आरटीई के अंतर्गत वर्तमान सत्र 2022 – 23 में अगले सप्ताह से शुरू होने वाली प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत प्रवेशित होने वाले स्टूडेंट्स की फीस का भुगतान शिक्षा विभाग द्वारा नहीं किए जाएगा। जब ये स्टूडेंट्स क्रमोन्नत होकर पहली कक्षा में पहुंचेंगे, तब इनके लिए भुगतान की प्रक्रिया लागू हो सकेगी। यह भुगतान पहली कक्षा से ही दिया जाएगा और पी पी – 3, पी पी – 4 और पी पी – 5 में आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित विद्यार्थियों की फीस का किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया जाएगा। यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि आगामी सत्र 2023-24 से भी यही व्यवस्था लागू रहेगी और प्री प्राईमरी कक्षाओं के लिए आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित स्टूडेंट्स को प्राईवेट स्कूल्स को अपने स्तर पर ही पूर्णतः निशुल्क शिक्षा देनी होगी। उल्लेखनीय है कि सत्र 2020-21 से राज्य सरकार ने आरटीई के अंतर्गत एडमिशन के लिए एंट्री कक्षा पहली कर दी थी। उसके बाद सत्र 2021-22 तथा सत्र 2022 – 23 में पहली में ही आरटीई के अंतर्गत प्रवेश दिए गए थे। सरकार के इस फैसले को निजी शिक्षण संस्थानों के एक संगठन ने चुनौती देते हुए इसे अवैधानिक बताया। तीन साल की न्यायिक लडाई के बाद आखिरकार अगले सप्ताह से शिक्षा विभाग प्री प्राईमरी कक्षाओं के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।
ये अन्याय ही नहीं जिद्द की पराकाष्ठा है
सरकार ने जिद्द की कि आरटीई के अंतर्गत एडमिशन पहली कक्षा से ही दिए जाएंगे। लेकिन सरकार के इस गलत फैसले को कोर्ट में मिली चुनौती के आगे घुटने टेकने पड़े। हाइकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकारी जिद्द को अवैध करार दिया है लेकिन शिक्षा विभाग का अड़ियल रवैया सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में शुरू की जाने वाली प्रस्तावित प्रवेश प्रक्रिया से स्पष्ट हो रहा है। क्योंकि विभाग प्रवेश प्रक्रिया तो शुरू करने वाला है लेकिन प्रवेशित विद्यार्थियों के फीस का किसी भी तरह का भुगतान प्री प्राईमरी कक्षाओं के लिए नहीं करेगा। जब विभाग भुगतान नहीं देगा तो निजी शिक्षण संस्थान इन कक्षाओं में प्रवेश नहीं देने के रास्ते निकालने की कोशिश करेंगे और सरकार व विभाग यही चाहते हैं कि इन कक्षाओं में आरटीई के अंतर्गत एडमिशन हो ही नहीं। जैसे ही प्रस्तावित प्रवेश प्रक्रिया लागू होगी, कोर्ट में चुनौती मिलनी तय है और विभाग भी इस दिशा में तैयार है क्योंकि उसे अच्छी तरह से ज्ञात है कि जब तक मामला कोर्ट में चलेगा, प्रक्रिया के तहत प्रवेश हेतु रूचि नहीं दिखाई जाएगी।





