
बिना भुगतान अध्ययन कराने की बाध्यता हिटलरशाही एवं अन्यायपूर्ण
आरटीई के अंतर्गत आगामी सत्र 2023-24 के लिए चार कक्षाओं में प्रवेश प्रक्रिया शुरू किए जाने के शिक्षा विभाग के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। एक साथ चार कक्षाओं में आरटीई के प्रवेश देने एवं बिना भुगतान प्री प्राईमरी कक्षाओं में तीन साल तक अध्ययन कराने की बाध्यता का विरोध करते हुए प्राईवेट स्कूल्स के संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि शिक्षा विभाग का यह कार्य हिटलरशाही है, जिसे बर्दाश्त करना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग द्वारा आरटीई के अंतर्गत आगामी सत्र 2023-24 के लिए पी पी 3+, पी पी 4+, पी पी 5+ एवं पहली कक्षा में प्रवेश के लिए टाईम फ्रेम जारी किया गया है। विज्ञप्ति के साथ ही शिक्षा विभाग ने दिशा निर्देश – 2023-24 भी जारी कर दिए हैं। जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक प्री प्राईमरी (पी पी 3+, पी पी 4+एवं पी पी 5+) में आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित होने वाले स्टूडेंट्स को बिना पुनर्भरण अध्ययन कराने की बाध्यता की शर्त डाली गई है। उल्लेखनीय है कि सत्र 2022-23 के लिए शिक्षा विभाग ने हाइकोर्ट के अंतरिम आदेश की पालना में 6 फरवरी से 1 मार्च 2023 तक पी पी 3+, पी पी 4+, एवं पी पी 5+ के प्रवेश हेतु प्रक्रिया लागू की थी। इस प्रक्रिया में भी शिक्षा विभाग ने बिना पुनर्भरण के अध्ययन कराने की बाध्यता की शर्त डाली थी। इन दोनों ही कार्यों के विरोध हेतु प्राईवेट स्कूल्स संचालक एवं इनके विभिन्न संगठनों द्वारा योजनाएं बनाईं जा रही हैं। हालांकि स्कूल क्रांति संघ, जयपुर द्वारा इस प्रक्रिया को आरटीई के नियमों का उल्लंघन बताते हुए जयपुर हाइकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। स्कूल क्रांति संघ की प्रदेश अध्यक्ष हेमलता शर्मा के अनुसार 2022-23 के अंतर्गत सत्र समाप्त होने की कगार पर शुरू की गई इस विसंगति पूर्ण प्रक्रिया के अंतर्गत पुनर्भरण हेतु चुनौती दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि उनको उस वक्त लगा कि कोर्ट के अंतरिम आदेश की अनुपालना में केवल सत्र 2022-23 में ही एक साथ चार कक्षाओं में प्रवेश प्रक्रिया लागू की गई होगी लेकिन विभाग ने हठधर्मिता दिखाते हुए इसे आगामी सत्र 2023-24 में भी थोप दिया है जो कि सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का विधि सम्मत अध्ययन कर रहे हैं और शीघ्र ही पूर्व में प्रस्तुत केस में अन्य विसंगतियां संबंधित बिंदु भी जोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि लीगल एक्सपर्ट के सुझाव के अनुसार एक पत्र तैयार किया गया है जिसे राज्य की प्रत्येक स्कूल द्वारा सरकार एवं शिक्षा विभाग तक डाक या ईमेल द्वारा प्रेषित कर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सुश्री हेमलता ने कहा कि उनके संगठन द्वारा अतिशीघ्र ही इस संबंध में प्रदेशव्यापी आंदोलन किए जाने की योजना बनाई जा रही है। स्कूल क्रांति संघ के अलावा प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा), इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन एंड वेलफेयर सोसाइटी, स्कूल वेलफेअर एसोसिएशन, राजस्थान (स्वराज), रिकॉक्नाइज्ड स्कूल एसोसिएशन, प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन, गैर सरकारी स्कूल एवं जनकल्याण संस्थान, स्वयं सेवी शिक्षण संस्थान समिति इत्यादि प्रदेश स्तरीय संगठनों ने भी इस अन्यायपूर्ण और हिटलरी निर्णय का पुरजोर विरोध करते हुए आंदोलनात्मक कार्यवाही की योजना बनानी शुरू कर दी है।












































