आरटीई के अंतर्गत सत्र 2023-24 का प्रवेश संबंधित फाईनल डिसीजन 20 जुलाई को आने की उम्मीद

शिक्षा विभाग के अनुरोध पर न्यायालय 20 जुलाई को फिर करेगा सुनवाई

आरटीई के अंतर्गत चार कक्षाओं हेतु शुरू की गई प्रवेश प्रक्रिया एवं प्री प्राईमरी में बिना भुगतान शिक्षण कराने संबंधी याचिकाओं पर जयपुर हाईकोर्ट द्वारा फाईनल डिसीजन अगले एक दो दिन में सुनाए जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि सत्र 2022-23 एवं 2023-24 में भी चारों कक्षाओं में प्रवेश हेतु दिशा निर्देश और प्रवेश प्रक्रिया जारी होते ही प्राईवेट स्कूल्स द्वारा इनका विरोध शुरू हो गया। अनेक स्कूल्स ने हाईकोर्ट में याचिकाएं तक दायर कर दीं। स्कूल क्रांति संघ, जयपुर सबसे पहले इस संबंध में हाईकोर्ट पहुंचा और आरटीई के नियमानुसार प्रवेश प्रक्रिया नहीं होने को चुनौती दी साथ ही भुगतान के लिए भी केस फाईल किया। इस दौरान जयपुर की अनेक स्कूल्स नीरजा मोदी, केंब्रिज कोर्ट, मॉडर्न, रुक्मिणी बिरला, मयूर, एसएमएस, विद्याश्रम भी हाईकोर्ट की चौखट तक गए और एक साथ चार कक्षाओं में प्रवेश को नियमानुसार नहीं बताते हुए एंट्री लेवल क्लास केवल एक ही रखने की अपील प्रस्तुत की। अंतिम समय में सीबीएसई स्कूल्स की यूनियन प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन ने भी रिट दायर कर दी।

11 से 14 जुलाई और फिर 16 से 18 से जुलाई तक रोजाना मैराथन सुनवाई के बाद 18 जुलाई को हाईकोर्ट की जयपुर बैंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि स्कूल्स आरटीई के नियमानुसार प्रवेश देते हैं तो भुगतान करने का दायित्व राज्य सरकार का है। प्री प्राईमरी कक्षाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा भुगतान नहीं करने का हवाला देकर शिक्षण संस्थानों को भुगतान से वंचित करना उचित नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को भुगतान का प्रबंध करना ही होगा। यह राज्य सरकार का दायित्व है। कोर्ट ने महाराष्ट्र हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर कहा कि एंट्री लेवल क्लास नर्सरी और पहली रखी जाए। इस दौरान कैचमेंट एरिया संबंधित पालना के लिए भी शिक्षा विभाग को न्यायालय द्वारा पाबंद करने की जानकारी मिली है।

इस फैसले के बाद 19 जुलाई को राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल महेंद्र सिंह सिंघवी ने हाईकोर्ट को आंकड़ों के साथ अवगत कराया कि वर्तमान सत्र 2023-24 में नर्सरी के अलावा पी पी 4+ एवं पी पी 5 + में भी बड़ी संख्या में प्रवेश हो चुके हैं, इसलिए इस वर्ष पी पी 4+ एवं पी पी 5 + में प्रवेश की अनुमति दी जाए। न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह ने एडवोकेट जनरल सिंघवी के अनुरोध के आधार पर 20 जुलाई को इस संबंध में पुनः सुनवाई के लिए सभी पक्षों को सूचित करा दिया है। देखना यह है कि 20 जुलाई को न्यायालय द्वारा 18 जुलाई को उन्हीं द्वारा सुनाए गए फैसले को बरकरार रखा जाता है या कुछ संशोधन के साथ दुबारा फैसला सुनाया जाएगा।

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