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आरटीई के अंतर्गत सत्र 2025-26 के भुगतान को लेकर कोई चिन्ता नहीं लेकिन आगामी सत्र 2026-27 के प्रवेश हेतु निकाली लॉटरी

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अगले वित्तीय वर्ष में ही भुगतान मिलेगा

प्री प्राईमरी क्लासेज के भुगतान को लेकर शिक्षा विभाग ने साधा मौन

प्री प्राईमरी क्लासेज के भुगतान को लेकर प्राईवेट स्कूल्स द्वारा इन कक्षाओं में प्रवेश देने में नहीं दिखाई दे रही है रूचि

बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत आगामी सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत लगभग 6 लाख 34 हजार विद्यार्थियों के प्रवेश हेतु लॉटरी आज दोपहर में निकाली जा चुकी है। लेकिन वर्तमान सत्र 2025-26 एवं पिछले सत्रों के बकाया भुगतान को लेकर सरकार बिल्कुल गंभीर नहीं दिख रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने में अब तकरीबन एक पखवाड़ा ही शेष रहा है लेकिन इस वित्तीय वर्ष के अन्तर्गत आरटीई के भुगतान की कोई सुगबुगाहट नहीं है।

विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि अब अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में ही आरटीई का भुगतान हो सकेगा। शिक्षा विभाग से पता चला है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग 1000 करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान आरटीई के अंतर्गत कर चुका है, पिछले महीने ही 20 करोड़ रूपये आरटीई के अंतर्गत सत्र 2023-24 एवं सत्र 2024-25 की बकाया राशि हेतु शिक्षा विभाग को सरकार ने दिए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है कि अब इस वित्तीय वर्ष में किसी भी तरह की कोई गुंजाइश नहीं है। ज्ञानायाम को यह भी जानकारी मिली है कि आगामी वित्तीय वर्ष के शुरूआती अप्रैल महीने में भी कोई बजट आरटीई के अंतर्गत भुगतान हेतु नहीं मिलने वाला है। प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेशित होने वाले स्टूडेंट्स के लिए पुनर्भरण दिया जाएगा या नहीं, इस बिन्दु पर शिक्षा विभाग अभी भी मौन है। उनके मौन से इतना जरूर समझ में आ रहा है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग की बिल्कुल मंशा नहीं है कि प्री प्राईमरी हेतु आरटीई के अंतर्गत भुगतान किया जाए।

प्राईवेट स्कूल्स के हितों के लिए सदैव संघर्षशील संगठन प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा) द्वारा इस विषय में पुरजोर शब्दों में डिमांड की गयी है कि आरटीई के अंतर्गत बकाया तमाम राशि का भुगतान तुरन्त प्रभाव से किया जाना चाहिए। पैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने मांग की है कि प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेशित होने वाले स्टूडेंट्स के लिए भी भुगतान हेतु स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाएं। यदि सरकार एवं विभाग द्वारा प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु भुगतान नहीं किया जाएगा तो इन कक्षाओं में स्टूडेंट्स को प्रवेश मिलने में दिक्कतें आनी तय है।

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