
बीकानेर। आरटीई की प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं का आक्रोश खुलकर सामने आना शुरू हो गया है। राजस्थान सहित अनेक राज्यों में असहयोग आन्दोलन शुरू होने की जानकारी सामने आई है। पिछले दिनों जयपुर में स्कूल क्रांति संघ एवं निसा की बैठक में इस संबंध में गंभीर मंथन हो चुका है। स्कूल क्रांति संघ द्वारा “भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं” अभियान पूरे राजस्थान में चलाने के प्रयास शुरू किए जा चुके हैं। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 1 मार्च 2026 को आयोजित बैठक में असहयोग आंदोलन का ऐलान कर दिया है। बैठक में सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षा के अधिकार कानून के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाता तब तक प्रदेश के समस्त स्कूल असहयोग आंदोलन करेंगे। असहयोग आंदोलन में स्कूल शिक्षा विभाग के किसी भी कार्य में प्रदेश के निजी स्कूल सहयोग नहीं करेंगे। इसमें स्कूल किसी पत्र, नोटिस, आदेश का जवाब तक नहीं देंगे।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि आरटीई के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि पिछले 13 वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है। एसोसिएशन द्वारा इस मुद्दे पर शिक्षा विभाग के विरुद्ध उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की गई थी। याचिका के आदेश में उच्च न्यायालय ने अपने अंतिम आदेश में 6 माह के भीतर मांगों पर निर्णय लेने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत खेद का विषय है की गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले व्यय पर स्कूल शिक्षा विभाग संवेदनहीन है और कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी कर रहा है।
संगठन ने खुल्लमखुल्ला घोषणा कर दी है कि प्रतिपूर्ति राशि जब तक अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ेगी तब तक आन्दोलन जारी रहेगा। संगठन ने पुरजोर मांग की है कि कोर्ट के निर्देशों की पालना करते हुए शिक्षा विभाग को तुरन्त प्रभाव से प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान बढी हुई राशि के अनुसार पिछले 3 वर्षों का करना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि आरटीई के तहत प्रदाय की जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि प्रति विद्यार्थी / प्रति वर्ष प्राथमिक कक्षाओं में 7000 से बढा़कर 18000, माध्यमिक की 11,500 से बढ़ाकर 22,000 एवम हाई और हायर सेकंडरी की अधिकतम सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 तक किया जाए।