बच्चों में कौशल विकसित करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है प्रदर्शन विधि

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष

▪️विजयलक्ष्मी पारीक▪️

विज्ञान रचनात्मक है, जिज्ञासा को प्रेरित करता है व अन्वेषण की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करता है। साइंस का पूरा नाम ” सिस्टमैटिक एंड कांप्रिहेंसिव इन्वेस्टिगेशन एंड एक्सप्लोरेशन आंफ नेचर्स कॉजेज एंड इफैक्ट्स “ होता है। इसका शाब्दिक अर्थ ” व्यवस्थित और व्यापक जांच एवं प्रकृति के कारणों और प्रभावों की खोज” होता है। किसी भी वस्तु के बारे में जानकारी ग्रहण करना एवं जानकारी को सही तरीके से लागू करना तथा किसी भी वस्तु का सही अवलोकन करना और उसका विश्लेषण करना ही विज्ञान है। बच्चों के लिए विज्ञान हमेशा से ही एक अनोखी चीज रही है और हो भी क्यों न – विज्ञान है ही एक अनोखा विषय।

ज्यादातर बच्चों का दिमाग 6 साल तक 90% विकसित हो चुका होता है, जीवन की प्रारंभिक अवस्था ही हमारे बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है। हमारे दिमाग में सिनेप्सिस होती है, जो कि हमारे दिमाग की कोशिकाओं से बनी हुई होती है। बच्चों को सिनेप्सिस किसी भी व्यस्क व्यक्ति से काफी ज्यादा एक्टिव रहता है। इसीलिए बच्चे किसी भी चीज को जल्दी समझते हैं और करते भी हैं। आज के वैज्ञानिक युग में विज्ञान के प्रति बच्चों में रुचि का होना जरूरी है।

विज्ञान के प्रति जिज्ञासा तथा रुचि बढाने का कार्य सिर्फ शिक्षक ही कर सकता है। बच्चों में वैज्ञानिक जागरूकता पैदा करने के लिए आसपास के वातावरण से उन्हें परिचित कराना जरूरी है। प्राकृतिक वातावरण में होने वाले बदलाव एवं गतिविधियों को बच्चे जिज्ञासु होकर देखते हैं, सुनते हैं व समझने का प्रयास करते हैं। बच्चों में कौशल विकसित करने के लिए सबसे अच्छी विधि प्रदर्शन विधि है प्रदर्शन विधि में प्रदर्शनी और स्पष्टीकरण दोनों सम्मिलित है।

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