प्राईवेट स्कूल्स को प्रताड़ित और परेशान करने का शगूफा शाला संबलन निरीक्षण

तुगलकी फरमान को लागू होने से रोकना ही प्राईवेट स्कूल्स की अस्मिता की रक्षा कर सकेगा

बीकानेर। शाला संबलन के नाम पर प्राईवेट स्कूल्स को प्रताड़ित और परेशान करने की कोशिश आखिर कार शिक्षा विभाग ने लागू कर दी है। विभाग ने इस संबंध में 15 पेज के दिशा निर्देश जारी किए हैं। विभाग द्वारा आरटीई, फीस विनिमयन एवं अन्य व्यवस्थाओं तथा सुविधाओं का निरीक्षण करने हेतु संयुक्त निदेशक से लेकर यूसीईओ और पीईओ तक के टार्गेट निर्धारित कर दिए हैं। जैसे जैसे यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होता जा रहा है, शिक्षा विभाग के प्रति प्राईवेट स्कूल्स का विरोध भी मुखर होता जा रहा है।
प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा), राजस्थान के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने इस आदेश का खुल्लमखुल्ला विरोध करते हुए सभी प्राईवेट स्कूल्स संचालकों से अपील की है कि इस तरह के निरीक्षण के लिए कोई भी अधिकारी आए, उन्हें पूरी गरिमा और विनम्रता के साथ इंकार कर देना है और ऐसा निरीक्षण नहीं कराना है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा विभाग विभिन्न उपायों एवं आयामों के बाद भी सरकारी स्कूल्स में नामांकन बढाने में नाकाम होता जा रहा है तो उसने प्राईवेट स्कूल्स की पढ़ाई को दुष्प्रभावित करने के लिए यह योजना शुरू की है। इसलिए सभी प्राईवेट स्कूल को इस तरह के निरीक्षण का विरोध करना आवश्यक हो गया है। खैरीवाल ने कहा कि अतिशीघ्र ही इस विषय में कार्ययोजना बनाकर इस संबंध में एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी स्कूल्स से आह्वान किया है कि पूरी ताकत और एकजुटता के साथ इस तुगलकी फरमान का विरोध ही प्राईवेट स्कूल्स की अस्मिता को सुरक्षित रख सकेगा।

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