विभाग ने घोर लापरवाही मानते हुए कड़ी कार्रवाई हेतु जारी किए निर्देश
देहरादून। उत्तराखंड में प्राईवेट स्कूल्स द्वारा वर्तमान शिक्षा सत्र में आरटीई के अंतर्गत रूचि नहीं दिखाए जाने के कारण कई बच्चों को शिक्षा के अधिकार का लाभ नहीं मिल पाया। मिली जानकारी के मुताबिक 1955 स्कूल्स के शिक्षा विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं करने की वजह से इस साल आरटीई कोटे में काफी कम सीट्स दर्ज हुई हैं। नतीजतन बड़ी संख्या में बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून का लाभ नहीं मिल पाया। शिक्षा विभाग ने इसे प्राईवेट स्कूल्स की घोर लापरवाही मानते हुए पंजीयन नहीं कराने वाली 1955 प्राईवेट स्कूल्स को नोटिस भेजकर कारण पूछा है।
अभी तक देहरादून में ही नोटिस भेजे जाने की जानकारी मिली है। विभाग ने अब बाकी जिलों में भी नोटिस भिजवाने की तैयारी कर ली है। डीजी शिक्षा बंशीधर तिवाड़ी ने बताया कि स्कूल्स की लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है। संतोषजनक जवाब न देने वाले स्कूल्स की मान्यता भी सस्पेंड की जा सकती है।उनके मुताबिक सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पंजीकरण नहीं कराने वाले स्कूल्स के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं।
विदित रहे कि राज्य में 4433 मान्यता प्राप्त गैर सरकारी शिक्षण संस्थाएं हैं। आरटीई के अंतर्गत प्रतिवर्ष शिक्षा विभागीय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाते हुए प्रत्येक स्कूल को आरटीई कोटे के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत सीट्स का ब्योरा देना होता है, लेकिन इस साल 2478 स्कूल्स ने ही पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया। बाकी 1955 स्कूल्स ने आरटीई एडमिशन से दूरी बना ली। इस कारण राज्य में आरटीई कोटे के अंतर्गत लगभग 23 हजार स्टूडेंट्स को ही प्रवेश मिल सका है जबकि पिछले वर्ष तक ये संख्या 30 हजार से अधिक तक रहती थी।
शीघ्र ही मिलेगा वंचित बच्चों को एक और अवसर
विभागीय सूत्रों के अनुसार आरटीई कोटे के तहत एडमिशन से वंचित छात्र-छात्राओं को जल्द ही दोबारा आवेदन करने का मौका दिए जाने हेतु टाईम फ्रेम बनाया जा रहा है। एपीडी-समग्र शिक्षा अभियान डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि विभागीय स्तर पर एडमिशन प्रक्रिया की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। जिन स्टूडेंट्स को प्रथम चरण में एडमिशन से वंचित रहना पड़ा है, वे भी पुनः प्रयास कर सकेंगे।

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