
स्थानीय वेशभूषा की अनिवार्यता की घोषणा का भी नहीं कोई अता पता
बीकानेर, 26 मार्च। सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म को एक जैसी करने की शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की अती महत्वाकांक्षी योजना केवल घोषणा तक ही सिमट कर रह गयी है। दिलावर द्वारा अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े में की गई घोषणा पर अभी तक कोई कार्यवाही ही शुरू नहीं हुई है जबकि नया सत्र शुरू होने में अब एक सप्ताह भी नहीं बचा है। यह जानकारी स्पष्ट रूप से राजस्थान के शिक्षा विभाग में घोषणाओं और उनके क्रियान्वयन के बीच के बड़े अंतर को दर्शाती है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ये दोनों योजनाएं समान यूनिफॉर्म और साप्ताहिक स्थानीय वेशभूषा सैद्धांतिक रूप से समानता और सांस्कृतिक गर्व को बढ़ावा देने वाली लग रही थीं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। समान यूनिफॉर्म ‘एक राज्य, एक वेश’ की अवधारणा घोषणा भर होकर रह गयी है। शिक्षा मंत्री का तर्क था कि इससे अमीर-गरीब का भेद मिटेगा और बच्चों में हीन भावना नहीं आएगी। :
शिक्षा निदेशक, प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा, सीताराम जाट ने ज्ञानायाम द्वारा इस संबंध में मांगी गयी जानकारी के प्रत्युत्तर में बताया कि विभाग को इस संबंध में अभी तक किसी तरह की गाईडलाईंस प्राप्त नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर के प्रथम पखवाडे़ में दिलावर ने घोषणा की थी कि सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म एक जैसी की जाएगी। उन्होंने कहा था कि समान यूनिफॉर्म होने से बच्चों में आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई हीन भावना नहीं आएगी तथा इससे गरीब अमीर का फर्क मिट सकेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले राजस्थान सरकार से संबद्ध स्कूल्स में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद सीबीएसई सहित सभी प्राइवेट स्कूल्स में लागू किया जाएगा। मंत्री का कहना था कि इसके लिए प्राइवेट स्कूल्स को दो विकल्प दिए जाएंगे। पहला सभी प्राइवेट स्कूल मिलकर एक जैसी यूनीफॉर्म तय कर सकते हैं और दूसरा, सरकारी स्कूल्स की वर्तमान यूनिफॉर्म को भी अपनाया जा सकता है।
साप्ताहिक स्थानीय यूनीफॉर्म का एलान को भी नहीं मिला अमलीजामा
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने नवंबर के द्वितीय पखवाड़े में एलान किया था कि सरकारी और प्राइवेट स्कूल्स के स्टाफ व स्टूडेंट्स को सप्ताह में एक दिन स्थानीय वेशभूषा में आना अनिवार्य किया जाएगा लेकिन 4 महीने बीत जाने के बाद भी इस एलान का कोई अता पता नहीं है। सांस्कृतिक जागरूकता एवं लोक संस्कृति संरक्षण को प्रोत्साहित करने का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री ने यह घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यूनिफॉर्म में हथकरघा वस्त्र (खादी) शामिल करने पर भी विचार चल रहा है।