
प्री प्राईमरी की तीनों कक्षाओं में प्रवेश की योजना कोर्ट के निर्देशों की अवमानना : सुश्री शर्मा

बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत सत्र 2026-27 से पहली कक्षा के साथ साथ सभी प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेश की प्रक्रिया शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है लेकिन प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेशित होने वाले स्टूडेंट्स की फीस के भुगतान को लेकर शिक्षा विभाग ने मौन साध लिया है। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि इन कक्षाओं में प्रवेशित होने वाले स्टूडेंट्स की फीस का भुगतान किया जाएगा या नहीं। सिंगल बैंच के फैसले को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा प्री प्राईमरी की सभी कक्षाओं में प्रवेश देने हेतु निर्देशित किया गया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा जारी फैसले में प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु भुगतान संबंधित कोई जिक्र नहीं किए जाने की बात शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा कही जा रही है जबकि फैसले के बिन्दु क्रमांक 38 में बताया गया है कि समाज के वंचित और कमजोर वर्गों से आने वाले 25% छात्रों को गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश देने की शिक्षा विभाग अनुमति देगा और ऐसे स्कूल्स को शिक्षा देने के लिए उसी सीमा तक अनुदान (ग्रांट-इन-एड) भी देगा। साथ ही शिक्षा विभाग यह भी भूल रहा है कि सिंगल बैंच के फैसले में प्री प्राईमरी कक्षाओं के लिए भुगतान हेतु स्पष्ट निर्देश दिए गए थे और डबल बैंच द्वारा जारी फैसले में सिंगल बैंच के फैसले को सही बताते हुए ही निर्देश दिए गए हैं। उधर प्राईवेट स्कूल्स के संगठनों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। स्कूल क्रांति संघ की प्रदेश अध्यक्ष हेमलता शर्मा ने प्रेस बयान रिलीज कर चेतावनी दी है कि जब तक पिछला बकाया भुगतान शिक्षा विभाग द्वारा नहीं किया जाता है तब तक आरटीई के अंतर्गत प्रवेश नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के फैसले की अवहेलना विभाग द्वारा की जा रही है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने केवल पी पी 3 एवं पहली कक्षा के लिए ही निर्देशित किया है जबकि विभाग पी पी 3, पी पी 4, पी पी 5 एवं पहली कक्षा में प्रवेश की विज्ञप्ति जारी कर खुल्लमखुल्ला हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर रहा है।

क्या कहता है हाईकोर्ट का फैसला

4 नवंबर 2025 को हुई फाईनल सुनवाई के पश्चात 8 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट, जयपुर की डबल बेंच द्वारा सुनाए गये निर्णय का अध्ययन करने से सामने आया कि हाईकोर्ट द्वारा जारी फैसले में स्पष्ट रूप से सभी प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेश देने हेतु कहा गया है। न्यायाधीश बलजिन्द्र सिंह संधू एवं संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा सुनाए गये फैसले में कहा गया है कि यदि पहली कक्षा में ही आरटीई के अंतर्गत प्रवेश का प्रावधान होगा तो गरीब तबके के बच्चे शिक्षा में पिछड़ जाएंगे क्योंकि नोन आरटीई के अंतर्गत पढ़ने वाले स्टूडेंट्स प्री प्राईमरी कक्षाओं को पढ़कर पहली में आएंगे जबकि आरटीई के अंतर्गत जरूरी नहीं है कि सभी बच्चों द्वारा प्री प्राईमरी की पढाई की जाए। इसलिए हाईकोर्ट ने सभी प्री प्राईमरी कक्षाओं में आरटीई के अंतर्गत प्रवेश हेतु फैसला दिया है। हालांकि शिक्षा विभाग की तरफ से पैरवी करने वाले विद्वान अधिवक्ताओं ने कहा था कि विभाग द्वारा कक्षा 1 से ही मान्यता दी जाती है, इसलिए केवल कक्षा – 1 में ही आरटीई के अंतर्गत प्रवेश की व्यवस्था लागू की जानी उचित रहेगी। डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि कमज़ोर तबके और पिछड़े ग्रुप के बच्चों को प्री प्राइमरी एजुकेशन से दूर नहीं किया जाना चाहिए। यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि जैसे-जैसे देश तरक्की कर रहा है, बच्चों का IQ लेवल बढ़ा है और अगर बच्चों को प्री प्राइमरी स्टेज पर सीखने से दूर रखा जाता है, तो वे अच्छी तरह से बने-बनाए ऊँचे समाज के बच्चों से पीछे रह सकते हैं। RTE एक्ट का मकसद ही खत्म हो जाएगा, अगर कमज़ोर तबके और पिछड़े ग्रुप के स्टूडेंट्स को सिर्फ़ क्लास-I लेवल पर एडमिशन दिया जाता है, क्योंकि प्री प्राइमरी क्लास में पहले से पढ़ चुके दूसरे बच्चों के मुकाबले उनकी हालत खराब होती है।
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