Category: Educational

  • प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के मांगपत्र पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री ने दी हरी झंडी

    प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के मांगपत्र पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री ने दी हरी झंडी

    वर्ष में केवल एक बार ही होगा प्राईवेट स्कूल्स का संबलन निरीक्षण

    बीकानेर, 22 जुलाई 2026। शिक्षा संबलन निरीक्षण के संबंध में प्राईवेट स्कूल्स के वर्ष में केवल एक बार ही निरीक्षण करने हेतु शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने भी सहमति दे दी है। यह पुख्ता जानकारी राजधानी के शिक्षा विभागीय सूत्रों से पता चली है। मिली जानकारी के अनुसार जयपुर स्थित शिक्षा संकुल में सोमवार, 20 जुलाई 2026 को हुई उच्च स्तरीय मीटिंग में प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के मांगपत्र के संबंध में डिस्कशन के दौरान दिलावर ने वर्ष में एक बार ही निरीक्षण करने की सहमति दी। विदित रहे कि 16 जुलाई 2026 को अतिरिक्त शिक्षा सचिव राजेश यादव ने फेडरेशन के साथ हुई वार्ता के दौरान वर्ष में सिर्फ एक मर्तबा संबलन निरीक्षण का आश्वासन दिया था। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आफीशियल निर्देश या आदेश जारी नहीं किए गए हैं। यह निरीक्षण प्रति वर्ष 1 अप्रेल से 30 सितंबर तक किये जाने का नियम बनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के मांगपत्र में शिक्षा संबलन निरीक्षण संबंधित बिंदु पहले नंबर पर ही था। मंत्री ने जो टी सी संबंधित बयान दिया था, वह फेडरेशन के बिंदु क्रमांक 2 पर हुई चर्चा के उपरांत ही दिया था। अगले बिंदुओं पर शिक्षामंत्री के समक्ष कोई चर्चा की जानकारी नहीं मिल सकी है। इन दोनों बिंदुओं सहित सभी बिंदुओं पर उसी दिन दोनों उच्चाधिकारियों एसीएस राजेश यादव एवं डायरेक्टर सीताराम जाट के के बीच अलग से मंत्रणा की जानकारी भी मिली है। फेडरेशन के सचिव गिरिराज खैरीवाल ने बताया कि फेडरेशन द्वारा इस निरीक्षण को पूरी तरह से वापस लेने की मांग की गई थी जबकि हमें वर्ष में एक मर्तबा इस निरीक्षण कार्य को करवाए जाने की जानकारी मिल रही है। उन्होंने बताया कि हमारी मांग इस संबलन निरीक्षण को पूरी तरह से वापिस लेने की है। साथ ही हमारी 12 अन्य वाजिब मांगों का भी समाधान करने हेतु मांगपत्र दिया हुआ है। यदि फेडरेशन द्वारा दिए गए अल्टीमेटम में उल्लेखित तारीख 24 जुलाई 2026 तक इन सभी 13 मांगों का समाधान नहीं किया जाता है तो मजबूरीवश फेडरेशन द्वारा आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

    खैरीवाल के नेतृत्व में फेडरेशन के प्रतिनिधि मंडल ने निदेशक सीताराम जाट से की मुलाकात

    फेडरेशन के सचिव गिरिराज खैरीवाल के नेतृत्व में बुधवार को फेडरेशन के डायरेक्टर कैलाश शर्मा (अजमेर), सह सचिव लोकेश जैन (टोंक) एवं लोकेश कुमार मोदी (बीकानेर) की निदेशक, प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा, सीताराम जाट एवं अतिरिक्त निदेशक प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा, शैलेन्द्र कुमार देवड़ा से उनके कक्षों में अलग अलग वार्ता हुई। वार्ताओं के दौरान निदेशक श्री जाट ने बताया कि फेडरेशन के मांगपत्र पर सोमवार को सचिवालय में बिंदुवार पर डिस्कशन हो चुका है। जिन बिंदुओं पर सरकार से चर्चा होनी थी, वो भी हो चुकी है। सब कुछ बहुत अच्छा करने के प्रयास त्वरित रूप से किए जा रहे हैं, इन सब में थोड़ा समय लगेगा। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों का इंतजार करें, बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे। अतिरिक्त निदेशक शैलेन्द्र कुमार देवड़ा ने प्रतिनिधि मंडल को बताया कि फेडरेशन द्वारा प्रस्तुत मांगपत्र की परीक्षण रिपोर्ट शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को ही सचिवालय भेजी जा चुकी है तथा सोमवार को जयपुर में उच्चाधिकारियों का इस विषय में मंथन भी हो चुका है। उन्होंने बताया कि सब कुछ पॉजीटिव करने की कोशिशें चल रही हैं लेकिन अभी थोड़ा समय और लगेगा। प्रतिनिधि मंडल ने सहायक निदेशक (आरटीई) श्रीमती चंद्र किरण पंवार एवं सहायक निदेशक (पीएसपी) मोहित मान से भी मुलाकात की।

    दिए गये आश्वासन का क्रियान्वयन 24 जुलाई 2026 तक नहीं होने पर किया जाएगा आंदोलन

    26 जुलाई 2026 को जयपुर में होगी फेडरेशन की मीटिंग

    फेडरेशन के सचिव गिरिराज खैरीवाल ने बताया कि फेडरेशन द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के बाद फेडरेशन को मिले आश्वासन का क्रियान्वयन यदि 24 जुलाई 2026 तक नहीं किया जाएगा तो फेडरेशन द्वारा आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में फेडरेशन के साथ जुड़े 11 राज्यस्तरीय संगठनों के मुखियाओं सहित फेडरेशन की 38 सदस्यीय कार्यकारिणी की आवश्यक मीटिंग का आयोजन 26 जुलाई 2026 को जयपुर में प्रस्तावित है। खैरीवाल ने बताया कि इस मीटिंग में सर्वसम्मति से फेडरेशन की आगामी आंदोलन की व्यूह योजना को फाइनल किया जाएगा।

  • प्राईवेट स्कूल्स को प्रताड़ित और परेशान करने का शगूफा शाला संबलन निरीक्षण

    प्राईवेट स्कूल्स को प्रताड़ित और परेशान करने का शगूफा शाला संबलन निरीक्षण

    तुगलकी फरमान को लागू होने से रोकना ही प्राईवेट स्कूल्स की अस्मिता की रक्षा कर सकेगा

    बीकानेर। शाला संबलन के नाम पर प्राईवेट स्कूल्स को प्रताड़ित और परेशान करने की कोशिश आखिर कार शिक्षा विभाग ने लागू कर दी है। विभाग ने इस संबंध में 15 पेज के दिशा निर्देश जारी किए हैं। विभाग द्वारा आरटीई, फीस विनिमयन एवं अन्य व्यवस्थाओं तथा सुविधाओं का निरीक्षण करने हेतु संयुक्त निदेशक से लेकर यूसीईओ और पीईओ तक के टार्गेट निर्धारित कर दिए हैं। जैसे जैसे यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होता जा रहा है, शिक्षा विभाग के प्रति प्राईवेट स्कूल्स का विरोध भी मुखर होता जा रहा है।
    प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा), राजस्थान के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने इस आदेश का खुल्लमखुल्ला विरोध करते हुए सभी प्राईवेट स्कूल्स संचालकों से अपील की है कि इस तरह के निरीक्षण के लिए कोई भी अधिकारी आए, उन्हें पूरी गरिमा और विनम्रता के साथ इंकार कर देना है और ऐसा निरीक्षण नहीं कराना है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा विभाग विभिन्न उपायों एवं आयामों के बाद भी सरकारी स्कूल्स में नामांकन बढाने में नाकाम होता जा रहा है तो उसने प्राईवेट स्कूल्स की पढ़ाई को दुष्प्रभावित करने के लिए यह योजना शुरू की है। इसलिए सभी प्राईवेट स्कूल को इस तरह के निरीक्षण का विरोध करना आवश्यक हो गया है। खैरीवाल ने कहा कि अतिशीघ्र ही इस विषय में कार्ययोजना बनाकर इस संबंध में एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी स्कूल्स से आह्वान किया है कि पूरी ताकत और एकजुटता के साथ इस तुगलकी फरमान का विरोध ही प्राईवेट स्कूल्स की अस्मिता को सुरक्षित रख सकेगा।

  • बगैर फीस टीसी देने की बाध्यता समाप्त करने, परीक्षा परिणाम पोर्टल पर अपलोड करवाने, आरटीई का भुगतान समयबद्ध कराने सहित अनेक बिंदुओं पर शीघ्र कार्ययोजना बनाने का निदेशक ने दिया आश्वासन

    बगैर फीस टीसी देने की बाध्यता समाप्त करने, परीक्षा परिणाम पोर्टल पर अपलोड करवाने, आरटीई का भुगतान समयबद्ध कराने सहित अनेक बिंदुओं पर शीघ्र कार्ययोजना बनाने का निदेशक ने दिया आश्वासन

    प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के प्रतिनिधि मंडल के साथ एक घंटे चली सार्थक वार्ता

    आरटीई के अंतर्गत क्लेम बिल्स जनरेशन का काम होगा अतिशीघ्र शुरू

    बीकानेर, 11 जून। प्राईवेट स्कूल्स की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर गुरुवार को दोपहर 1:30 बजे से 2:30 बजे तक लगभग एक घंटे की सौहार्द वार्ता निदेशक, माध्यमिक शिक्षा के कक्ष में हुई। प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के सचिव गिरिराज खैरीवाल के नेतृत्व में मिले 34 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल के साथ आयोजित हुई इस सार्थक चर्चा परिचर्चा के दौरान सम्मिलित प्रतिनिधियों की प्रत्येक जिज्ञासा व प्रश्न का सकारात्मक समाधान निदेशक सीताराम जाट द्वारा किया गया। आरटीई के अंतर्गत प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु भुगतान करने, कोरोना काल के दौरान आफलाइन शिक्षण हेतु भुगतान करने, सत्र 2018-19 एवं 19-20 में लगाए गये बैरियर्स हटाकर भुगतान करने, बार बार जांच के नाम पर प्रताड़ित नहीं करने, दोहरे नामांकन की समस्या का समाधान त्वरित रूप से करने, यूनिट कॉस्ट में वृद्धि करने तथा प्रतिवर्ष भुगतान समयबद्ध रूप से करने सहित आरटीई से संबंधित समस्याओं पर विस्तृत चर्चा – परिचर्चा के पश्चात निदेशक सीताराम जाट ने आश्वासन दिया कि इन सभी समस्याओं के शीघ्र समाधान हेतु उचित एक्शन लिया जाएगा। आरटीई के अंतर्गत प्री प्राईमरी कक्षाओं के भुगतान से संबंधित विषय पर निदेशक ने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार को अवगत कराया जा चुका है। केंद्रीय गाईडलाईंस मिलने के पश्चात ही इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी की जा सकती है। फीस बकाया होने के बाद भी टीसी जारी किए जाने की पीड़ा का समाधान हेतु कोई न कोई रास्ता निकालने का उन्होंने पूरा भरोसा दिलाया। इस हेतु उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों से सुझाव भी लिए। उपस्थित प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों के मुताबिक इस संबंध में शीघ्र ही कार्ययोजना बनाने के लिए उन्होंने अपने मातहत अधिकारियों को निर्देशित किया। पीएस पोर्टल पर परीक्षा परिणाम को जोड़ने के सुझाव पर उन्होंने तुरन्त इस दिशा में काम करने के लिए निर्देश दिए। स्कूल्स की फीस एवं नामांकन संख्या के आधार पर उन्हें तीन या चार वर्गों में विभाजित करने के बिन्दु पर भी सार्थक चर्चा हुई। निदेशक महोदय ने कहा कि इस विषय में जो भी सकारात्मक हो सकेगा, वे प्रयास करेंगे। मान्यता व क्रमोन्नति नियमों तथा मान्यता सरेंडर करने हेतु सरलीकरण करने, कोचिंग्स का समय स्कूली क्लासेज के हेतु शाम को 4 बजे बाद करने सहित अनेक बिंदुओं पर सार्थक विचार विमर्श हुआ। वार्ता का समापन निदेशक के सम्मान के साथ हुआ। उन्हें सम्मान स्वरूप सेवा अभिनंदन चिन्ह एवं शाल प्रदान किए गए। इस दौरान आरटीई की सहायक निदेशक चंद्र किरण पंवार एवं मोहित मान भी उपस्थित रहे।

    इनकी रही सहभागिता

    वार्ता के दौरान प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा) के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के कार्यकारी अध्यक्ष के. एन. भाटी, जालौर, स्वराज के महासचिव डॉ. मुकेश मांडण, जोधपुर व उपाध्यक्ष भागीरथमल, चूरु, दिनेश पारीक, जोगलसर, श्रवण कुमार बांसूड़ा, सहीराम सारोठिया, स्वयंसेवी शिक्षण संस्था संरक्षण समिति, जयपुर के सवाई सिंह धायल, प्रेम चंद बैरवा, जगदीश चौपड़ा, रामचंद्र बुरी एवं रामप्रसाद पूनिया, निजी शिक्षण संस्थान विकास समिति, पाली के गोपीदास रामावत एवं जयशंकर त्रिवेदी, स्वयं सेवी शिक्षण संस्था संघ के बीकानेर जिलाध्यक्ष राजेश रंगा, अशोक उपाध्याय, तरविन्दर सिंह कपूर, किशन अनेजा, कृष्ण कुमार स्वामी, प्रभुदयाल गहलोत, डॉ. अभय सिंह टाक, रमेश बालेचा, लोकेश कुमार मोदी, नंदकिशोर कच्छावा, ओमदान चारण, केवलचंद भूरा, सौरभ अग्रवाल, सोमेश स्वामी, राकेश कुमार जोशी, विश्वजीत गौड़, मनोज बिहानी, नीलेश अनेजा इत्यादि उपस्थित रहे।

  • आरटीई भुगतान की प्रक्रिया को शिक्षा सचिवालय से मिला अनुमोदन

    आरटीई भुगतान की प्रक्रिया को शिक्षा सचिवालय से मिला अनुमोदन

    आधार वेरीफिकेशन की तकनीकी समस्या से बिल्स जेनरेशन में होगी देरी

    बीकानेर, 20 मई। लंबे समय से आरटीई के अंतर्गत भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे राज्य के गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों के लिए एक अच्छी खबर है। सत्र 2021-22 से लेकर गत सत्र 2025-26 तक के पुनर्भरण हेतु शिक्षा सचिवालय द्वारा बुधवार को अनुमोदन कर दिए जाने की पुख्ता जानकारी मिली है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत वर्षों के बकाया भुगतानों के निस्तारण के साथ-साथ सत्र 2024-25 की तर्ज पर ही सत्र 2025-26 के लिए भी दोनों किश्तों (प्रथम एवं द्वितीय) के क्लेम बिल एक साथ जेनरेट करने के विकल्प पोर्टल पर उपलब्ध कराए जाएंगे। शिक्षा निदेशालय इस प्रक्रिया को त्वरित गति से लागू करने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है और क्लेम बिल जनरेशन संबंधी समस्त विभागीय तैयारियां पहले ही पूरी की जा चुकी हैं।

    हालांकि वर्तमान में पीएस पोर्टल पर चल रहे एक अनिवार्य तकनीकी अपग्रेडेशन के कारण क्लेम बिलों के लाइव होने में थोड़ा और समय लगेगा। वर्तमान में पोर्टल पर विद्यार्थियों के ‘आधार वेरिफिकेशन’ की प्रक्रिया में तकनीकी व्यवधान आ रहा है। आरटीई के नियमों के अनुसार पोर्टल पर पंजीकृत सभी आरटीई विद्यार्थियों का आधार वेरीफिकेशन होना अनिवार्य है। नियमानुसार, यदि किसी विद्यालय के एक भी आरटीई विद्यार्थी का वेरीफिकेशन लंबित रहता है, तो तकनीकी रूप से उस पूरे संस्थान का क्लेम बिल जेनरेट नहीं किया जा सकता। इस तकनीकी विसंगति के स्थाई और त्वरित समाधान हेतु नेशनल इन्फॉरमैटिक्स सेंटर (एनआईसी) के विशेषज्ञ पिछले कई दिनों से युद्धस्तर पर कार्य कर रहे हैं।

    शिक्षा विभाग का मानना है कि इस तकनीकी समस्या के पूर्ण समाधान से पहले बिल जनरेशन का विकल्प शुरू करना प्राईवेट स्कूल्स एवं विभाग दोनों के लिए नई उलझनें पैदा कर सकता है। इसलिए जैसे ही एनआईसी आधार वेरिफिकेशन सिस्टम को अपडेट कर देगा पोर्टल पर बिल जनरेशन की सुविधा को तत्काल लाइव कर दिया जाएगा।


    विदित रहे कि ज्ञानायाम ने 7 मई को ही बता दिया था कि आरटीई के अंतर्गत सत्र 2025-26 के पुनर्भरण हेतु बिल्स जेनरेशन हेतु अब और अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन द्वारा दोनों किश्तों के भुगतान की प्रक्रिया सत्र 2024-25 की तरह ही एक साथ शुरू करने हेतु शिक्षा विभाग में 17 मार्च 9 अप्रैल एवं 01 मई को मांग पत्र दिए गए थे।

  • प्राईवेट स्कूल्स संचालकों के लिए बड़ी खबर, आरटीई के अंतर्गत सत्र 2025-26 के भुगतान हेतु अब इंतजार अंतिम चरण में

    प्राईवेट स्कूल्स संचालकों के लिए बड़ी खबर, आरटीई के अंतर्गत सत्र 2025-26 के भुगतान हेतु अब इंतजार अंतिम चरण में

    बजट की बाधा दूर: ₹1250 करोड़ की मिली हरी झंडी

    बीकानेर, 07 मई, 2026। ​शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत सत्र 2025-26 के पुनर्भरण (Reimbursement) के लिए अब लंबा इंतज़ार खत्म होने वाला है। शिक्षा निदेशालय, बीकानेर और शासन सचिवालय, जयपुर के बीच फाइलों का दौर अंतिम पड़ाव पर है और उम्मीद है कि जल्द ही करोड़ों रुपयों का भुगतान स्कूलों के खातों में पहुंचना शुरू हो जाएगा।

    ​​

    अप्रैल की शुरुआत के साथ ही शिक्षा विभाग को 1250 करोड़ रुपये की बजट स्वीकृति मिल चुकी थी। बजट मिलने के बाद, 9 अप्रैल 2026 को शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने भुगतान के प्रस्ताव तैयार कर शासन सचिवालय, जयपुर को भेज दिए थे। हालांकि, प्रक्रिया के बीच कुछ तकनीकी आपत्तियां सामने आई थीं, जिनका निस्तारण निदेशालय द्वारा कर दिया गया है। पिछले पखवाड़े में संशोधित प्रस्ताव पुनः जयपुर भिजवाए जा चुके हैं। शिक्षा सचिवालय से फाइल को अनुमोदन मिलते ही निदेशालय स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। निदेशालय ने अपनी ओर से पूरी तैयारी मुकम्मल कर ली है।”

    ​दोनों किश्तों का एक साथ भुगतान करने के प्रयास

    ​निदेशालय ने पिछले सत्र (2024-25) की तर्ज पर ही इस सत्र (2025-26) की दोनों किश्तों का भुगतान एक साथ करने का प्रस्ताव भेजा है।

    • ज्ञापन का असर: ‘प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन’ ने 17 मार्च और 9 अप्रैल को ज्ञापन सौंपकर पुरजोर मांग की थी कि सत्र 2025-26 की दोनों किश्तों का भुगतान एक साथ किया जाए ताकि स्कूलों की आर्थिक स्थिति सुधर सके।

  • भ्रामक विज्ञापनों पर बड़ी कार्रवाई : राजस्थान के दो दिग्गज कोचिंग संस्थानों पर लगा लाखों का जुर्माना

    भ्रामक विज्ञापनों पर बड़ी कार्रवाई : राजस्थान के दो दिग्गज कोचिंग संस्थानों पर लगा लाखों का जुर्माना

    नई दिल्ली । केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने विद्यार्थियों को भ्रामक विज्ञापनों के जरिए गुमराह करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इस कड़ी में राजस्थान के दो प्रमुख कोचिंग संस्थानों सीएलसी (सीकर) औरमोशन (कोटा) पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

    क्या है मामला ?

    प्राधिकरण की जांच में यह पाया गया कि इन दोनों संस्थानों ने NEET, IIT और JEE Advanced जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में “सर्वाधिक सफल परिणाम” देने के जो दावे समाचार पत्रों में प्रकाशित किए थे, वे पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक थे।

    कार्रवाई का विवरण

    जांच के बाद प्राधिकरण ने दोनों संस्थानों पर आर्थिक दंड लगाते हुए दोनों कोचिंग्स को सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करने एवं और भविष्य में फेक विज्ञापन प्रकाशित नहीं करने हेतु पाबंद किया है। सीकर स्थित सीएलसी कोचिंग पर 5 लाख तथा कोटा स्थित मोशन कोचिंग पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
    यह कार्रवाई उन सभी शिक्षण संस्थानों के लिए एक चेतावनी है जो छात्रों और अभिभावकों को लुभाने के लिए झूठे आंकड़ों और परिणामों का सहारा लेते हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले भ्रामक प्रचार अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

  • कक्षा 5 व 8 में पूरक विद्यार्थी सभी पूरक विषयों में उत्तीर्ण नहीं हो पाते हैं तो होंगे अनुत्तीर्ण

    कक्षा 5 व 8 में पूरक विद्यार्थी सभी पूरक विषयों में उत्तीर्ण नहीं हो पाते हैं तो होंगे अनुत्तीर्ण

    1 अप्रैल 2026 से लागू होगी नो डिटेंशन पॉलिसी

    बीकानेर। राजस्थान सरकार के प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार कक्षा 5 और कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब कक्षा 5 और 8 में “नो डिटेंशन पॉलिसी” (सबको उत्तीर्ण करने का नियम) में संशोधन कर दिया गया है। अब इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट तभी किया जा सकेगा जब सभी विषयों की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली जाएगी।

    यदि कोई विद्यार्थी मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण (fail) होता है, तो उसे सुधार के लिए पुनः परीक्षा (Supplementary Exam) अवसर मिलेगा। यदि छात्र पूरक परीक्षा में भी सभी विषयों में उत्तीर्ण नहीं हो पाता है, तो उसे उसी कक्षा में रोक दिया जाएगा (यानी उसे अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा)। यह नियम राजस्थान के राजपत्र (Rajasthan Gazette) में 30 मार्च 2026 को प्रकाशित होने के बाद 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा आरटीई के एक्ट के अंतर्गत नियम 13 – क के उपनियम (3) में संशोधन किया गया।

  • शिक्षा विभाग का यू-टर्न: RTE प्रवेश नियमों में बड़ा संशोधन, अब अभिभावक सुधार सकेंगे दस्तावेज

    शिक्षा विभाग का यू-टर्न: RTE प्रवेश नियमों में बड़ा संशोधन, अब अभिभावक सुधार सकेंगे दस्तावेज

    बीकानेर | 6 अप्रैल, 2026 राजस्थान शिक्षा विभाग ने शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत सत्र 2026-27 के प्रवेश नियमों में अपनी सख्त नीति को बदलते हुए ‘यू-टर्न’ ले लिया है। पहले विभाग ने स्पष्ट किया था कि अंतिम तिथि के बाद ऑनलाइन आवेदन में किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा, लेकिन अब हजारों छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विभाग को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। निदेशक प्रारंभिक शिक्षा, सीताराम जाट के हस्ताक्षर से जारी यह संशोधित आदेश 4 अप्रैल की रात करीब 10 बजे तैयार हुआ, जो 5 अप्रैल की रात तक सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से सार्वजनिक हुआ। हालांकि इस आदेश में विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि अभिभावकों द्वारा ‘रि-अपलोड’ किए गए दस्तावेजों की जांच की जिम्मेदारी किसकी होगी—निजी स्कूल प्रबंधन की या शिक्षा विभाग के अधिकारियों (CBEO/DEO/JD) की?

    प्रवेश प्रक्रिया में होगी देरी, पर हजारों को मिलेगी राहत

    विभाग के इस फैसले से आरटीई प्रवेश प्रक्रिया के समय चक्र (Timeframe) में बदलाव होना तय है, जिससे सत्र में कुछ विलंब हो सकता है। बावजूद इसके, यह निर्णय उन हजारों अभिभावकों के लिए संजीवनी साबित होगा जिनके आवेदन तकनीकी त्रुटियों या दस्तावेजों की कमी के कारण निरस्त होने की कगार पर थे।

    विभाग द्वारा जारी संशोधित कैलेंडर के अनुसार अब प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में संपन्न होगी –

    प्रथम चरण (संशोधन व निस्तारण): दस्तावेज रि-अपलोड: 6 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 तक। ऑनलाइन परिवेदना (शिकायत): रिजेक्शन की स्थिति में 17 अप्रैल तक मौका।

    द्वितीय चरण (रिक्त सीटों हेतु): नया अलॉटमेंट (NIC द्वारा): 21 अप्रैल 2026। दस्तावेज वेरिफिकेशन: 28 अप्रैल 2026 तक। रि-अपलोड सुविधा: 30 अप्रैल 2026 तक। ऑनलाइन परिवेदना: 8 मई 2026 तक।

    तृतीय चरण (अंतिम अवसर): सीट अलॉटमेंट: 12 मई 2026। वेरिफिकेशन अवधि: 12 से 14 मई 2026। संशोधित दस्तावेज रि-अपलोड: 12 से 18 मई 2026। अंतिम परिवेदना अवसर: 12 से 20 मई 2026।

  • आरटीई के अंतर्गत ऑनलाइन परिवेदना प्रस्तुत करने की तारीख में वृद्धि

    अब 6 अप्रैल तक की लगाई जा सकेगी परिवेदनाएं

    बीकानेर। सत्र 2026-27 में आरटीई के अंतर्गत दस्तावेज सत्यापन के दौरान रिजेक्ट किए गए दस्तावेज़ों हेतु परिवेदना लगाने की अंतिम तारीख को 2 अप्रैल से बढ़ाकर अब 6 अप्रैल तक कर दिया गया है। इस संबंध में प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय ने प्रथम चरण के आवंटन से संबंधित परिवेदनाओं के निस्तारण की समय सीमा 2 अप्रेल से बढ़ाकर अब 6 अप्रेल कर दी है। आरटीई के तहत आवेदन करने वाले अभिभावकों की शिकायतें सीबीईओ स्तर पर लंबित थीं। बताया जा रहा है कि आरटीई पोर्टल के सर्वर में दिक्कत आने और साइट के नहीं खुलने के कारण इन परिवेदनाओं की सुनवाई नहीं हो पा रही थी। जबकि सुनने में यह आ रहा है कि बहुत बड़ी संख्या में परिवेदनाएं लग जाने के कारण विभाग को निस्तारण हेतु पर्याप्त समय नहीं मिल रहा था। इसलिए विभाग ने रास्ता निकालते हुए परिवेदना निस्तारण के लिए चार दिन की वृद्धि कर दी है। इससे उन अभिभावकों को भी राहत मिल गयी है जो 2 तारीख तक परिवेदना ऑनलाइन नहीं कर सके थे।

  • सरकारी और प्राइवेट स्कूल्स के स्टूडेंट्स की कॉमन यूनिफॉर्म की योजना हुई धूमिल

    स्थानीय वेशभूषा की अनिवार्यता की घोषणा का भी नहीं कोई अता पता

    बीकानेर, 26 मार्च। सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म को एक जैसी करने की शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की अती महत्वाकांक्षी योजना केवल घोषणा तक ही सिमट कर रह गयी है। दिलावर द्वारा अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े में की गई घोषणा पर अभी तक कोई कार्यवाही ही शुरू नहीं हुई है जबकि नया सत्र शुरू होने में अब एक सप्ताह भी नहीं बचा है। यह जानकारी स्पष्ट रूप से राजस्थान के शिक्षा विभाग में घोषणाओं और उनके क्रियान्वयन के बीच के बड़े अंतर को दर्शाती है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ये दोनों योजनाएं समान यूनिफॉर्म और साप्ताहिक स्थानीय वेशभूषा सैद्धांतिक रूप से समानता और सांस्कृतिक गर्व को बढ़ावा देने वाली लग रही थीं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। समान यूनिफॉर्म ‘एक राज्य, एक वेश’ की अवधारणा घोषणा भर होकर रह गयी है। शिक्षा मंत्री का तर्क था कि इससे अमीर-गरीब का भेद मिटेगा और बच्चों में हीन भावना नहीं आएगी। :
    शिक्षा निदेशक, प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा, सीताराम जाट ने ज्ञानायाम द्वारा इस संबंध में मांगी गयी जानकारी के प्रत्युत्तर में बताया कि विभाग को इस संबंध में अभी तक किसी तरह की गाईडलाईंस प्राप्त नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर के प्रथम पखवाडे़ में दिलावर ने घोषणा की थी कि सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म एक जैसी की जाएगी। उन्होंने कहा था कि समान यूनिफॉर्म होने से बच्चों में आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई हीन भावना नहीं आएगी तथा इससे गरीब अमीर का फर्क मिट सकेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले राजस्थान सरकार से संबद्ध स्कूल्स में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद सीबीएसई सहित सभी प्राइवेट स्कूल्स में लागू किया जाएगा। मंत्री का कहना था कि इसके लिए प्राइवेट स्कूल्स को दो विकल्प दिए जाएंगे। पहला सभी प्राइवेट स्कूल मिलकर एक जैसी यूनीफॉर्म तय कर सकते हैं और दूसरा, सरकारी स्कूल्स की वर्तमान यूनिफॉर्म को भी अपनाया जा सकता है।

    साप्ताहिक स्थानीय यूनीफॉर्म का एलान को भी नहीं मिला अमलीजामा

    शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने नवंबर के द्वितीय पखवाड़े में एलान किया था कि सरकारी और प्राइवेट स्कूल्स के स्टाफ व स्टूडेंट्स को सप्ताह में एक दिन स्थानीय वेशभूषा में आना अनिवार्य किया जाएगा लेकिन 4 महीने बीत जाने के बाद भी इस एलान का कोई अता पता नहीं है। सांस्कृतिक जागरूकता एवं लोक संस्कृति संरक्षण को प्रोत्साहित करने का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री ने यह घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यूनिफॉर्म में हथकरघा वस्त्र (खादी) शामिल करने पर भी विचार चल रहा है।

  • दसवीं बोर्ड परीक्षा परिणाम तैयार, 25 मार्च तक आने की संभावना

    दसवीं बोर्ड परीक्षा परिणाम तैयार, 25 मार्च तक आने की संभावना

    अगले 3 दिवस परिणाम ही परिणाम

    बीकानेर, 22 मार्च। यदि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर 25 मार्च से पहले दसवीं कक्षा का परिणाम जारी कर देता है तो राजस्थान के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब होम एक्जाम्स से पहले बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम होंगे। यदि बोर्ड परीक्षा परिणाम 25 मार्च को भी निकाला जाता है तो भी यह एतिहासिक ही होगा क्योंकि होम एक्जाम्स और बोर्ड परीक्षा परिणाम एक ही दिन में घोषित होना भी पहली बार ही होगा। यह भी पहली मर्तबा होगा जब दसवीं का परीक्षा परिणाम बारहवीं के परीक्षा परिणाम से पहले घोषित होगा। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर के सूत्रों के मुताबिक 25 मार्च तक 10 वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित किए जाने की पूरी कवायद की जा रही है। इसी तरह से प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन (कक्षा – 5) एवं प्रारंभिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण पत्र (कक्षा – 8) के परिणाम भी 24 मार्च को जारी करने की कवायद में विभाग लगातार जुटा हुआ है। 12 वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 30 मार्च तक जारी करने में कवायद बोर्ड अनवरत कर रहा है। आगामी सत्र 2026 – 27 को 01 अप्रैल 2026 से शुरू करने की जिद्द के चलते बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम परीक्षाएं समाप्त होने के बीस – पच्चीस दिन में ही घोषित किये जाने की यह कवायद स्टूडेंट्स के लिए लाभकारी होगी या नुकसानदायी, यह तो परिणाम आने के बाद ही सामने आ सकेगा। 20 – 22 दिन में हर कक्षा के 10 लाख से अधिक परीक्षार्थियों का परिणाम तैयार करना कोई हंसी मजाक की बात नहीं है। जल्दबाजी हमेशा ही नुकसानदायक मानी जाती है। लगातार सुनने में आ भी रहा है कि जल्दबाजी के कारण परीक्षा कापीज जांच का काम बहुत लापरवाही से किया जा रहा है।

  • प्राईवेट स्कूल्स के संचालकों ने शिक्षा विभाग को दी खुली चुनौती “आरटीई का भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं”

    प्राईवेट स्कूल्स के संचालकों ने शिक्षा विभाग को दी खुली चुनौती “आरटीई का भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं”

    प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु भुगतान के प्रावधान बनाने के बाद ही इन कक्षाओं में प्रवेश दिए जाएंगे

    बीकानेर, 21 मार्च। आरटीई के अंतर्गत सत्र 2026-27 से तब तक प्री प्राईमरी ( पी पी 3, पी पी 4 एवं पी पी 5) कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिए जाएंगे जब तक शिक्षा विभाग द्वारा इन कक्षाओं के लिए भुगतान हेतु स्पष्ट प्रावधान नहीं कर दिए जाते हैं। बीकानेर स्थित आनन्द निकेतन में प्राईवेट स्कूल्स के संचालकों की हुई मिटिंग में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।

    पैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल की अगुवाई में आयोजित हुई इस मिटिंग में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि “भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं”। मिटिंग में उपस्थित शिक्षण संस्थाओं के संचालकों द्वारा आपस में गहन मंथन और चिंतन के बाद यह फैसला किया गया है। मिटिंग में गिरिराज खैरीवाल ने बताया कि 17 मार्च को ही इस संबंध में शिक्षा निदेशक को ज्ञापन देकर हमारे निर्णय से अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि 17 मार्च को दिए गए ज्ञापन में 10 दिन में प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु भुगतान संबंधित स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने की मांग करते हुए चेताया गया है कि इस मियाद के बाद विभाग स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं करेगा तो राज्य की एक भी प्राईवेट स्कूल प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेश प्रवेश नहीं देंगे।

    खैरीवाल ने बताया कि सरकार एवं शिक्षा विभाग प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेशित होने वाले एवं अध्ययनरत विद्यार्थियों के पुनर्भरण से बचना चाहते हैं जबकि हाईकोर्ट द्वारा 8 जनवरी 2026 को दिए गए फैसले में भुगतान हेतु आदेशित किया गया है। बावजूद इसके शिक्षा विभाग एवं सरकार अभी तक हठधर्मी बने हुए हैं और भुगतान करने से बचना चाह रहे हैं। पूर्व में भी विभाग से इस संबंध में निवेदन किये जा चुके हैं लेकिन विभाग ने मौन धारण कर रखा है। उन्होंने बताया कि मिटिंग में यह भी चर्चा हुई की आरटीई के अंतर्गत वर्तमान सत्र 2025-26 के भुगतान सहित पिछले रूके हुए समस्त प्रकार के आरटीई संबंधित पेंडिंग भुगतान किए जाने के लिए संघर्ष करना जरूरी हो गया है।

    इस अवसर पर तरविन्दर सिंह कपूर, रविकांत पुरोहित, सौरभ बजाज, प्रताप सिंह भाटी, बालकिशन सोलंकी, लोकेश कुमार मोदी, रघुनाथ बेनीवाल, सोमेश्वर स्वामी, कृष्ण कुमार स्वामी, जयपाल सिंह भाटी, मांगीलाल रामावत भैंरू सिंह भाटी, घनश्याम साध, मनोज कुमार राजपुरोहित, रमेश बालेचा, योगेश सांखला, उमानाराम प्रजापत, पुखराज व्यास, मनोज बिहानी, मनीष कुमार, दीपक पुरोहित, अमित मोदी, अमिताभ हर्ष, लक्ष्मण व्यास, विनोद रामावत, विष्णु दत्त मारू, धर्मेंद्र कुमार शर्मा, कन्हैयालाल साध, बृजभूषण शर्मा, हरिनारायण स्वामी, राकेश कुमार जोशी, महेश गुप्ता, जय गणेश कच्छावा, प्रेम गहलोत, मनोज व्यास, तुलसीराम तंवर, मनीष यादव, मुकेश पांडेय, हनुमान सिंह गहलोत, मूल सिंह शेखावत, कमल कुमार सोलंकी, अभिषेक आचार्य, शिवरतन भाटी, अमजद अब्बासी, सुरेश कुमार आचार्य, कमलचंद पंवार इत्यादि सहित उपस्थित अनेक सभासदों ने अपने अपने सुझाव प्रस्तुत कर इस बात की पुष्टि की कि जब तक प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु भुगतान के प्रावधान लागू नहीं किए जाएंगे, इन कक्षाओं में प्रवेश देना कतई संभव नहीं है। इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए डॉ. अभय सिंह टाक ने कहा कि हमारे द्वारा विभाग को दी गई मियाद पूरी होते ही विरोध के लिए सभी को तैयार रहना है। एकजुटता के साथ मिलकर संघर्ष करने से ही सफलता सिद्ध हो सकेगी। विजयसिंह शेखावत ने आभार प्रदर्शित किया तथा कहा कि एकता में ही बल है।

  • पुनर्भरण संबंधित स्पष्ट निर्देश 10 दिनों में जारी नहीं किए जाएंगे तो प्राईवेट स्कूल्स प्री प्राईमरी कक्षाओं में नहीं देंगे प्रवेश

    पुनर्भरण संबंधित स्पष्ट निर्देश 10 दिनों में जारी नहीं किए जाएंगे तो प्राईवेट स्कूल्स प्री प्राईमरी कक्षाओं में नहीं देंगे प्रवेश

    शिक्षा विभाग द्वारा प्री प्राईमरी कक्षाओं का आरटीई के अंतर्गत भुगतान नहीं करने की हठधर्मिता का प्राईवेट स्कूल्स ने किया विरोध

    11 संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के बैनर तले दिया गया ज्ञापन

    बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत प्री प्राईमरी कक्षाओं (पी पी 3, पी पी 4 एवं पी पी 5) के प्रवेश हेतु योग्य स्टूडेंट्स के भुगतान हेतु आगामी 10 दिन में यदि शिक्षा विभाग द्वारा स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं किए जाएंगे तो, प्राईवेट स्कूल्स इन कक्षाओं में एक भी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं देंगे। राजस्थान के 11 प्राईवेट स्कूल्स के संयुक्त संगठन प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के माध्यम से मंगलवार की शाम को अतिरिक्त निदेशक प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा शैलेन्द्र देवड़ा को यह ज्ञापन दिया गया है।

    फेडरेशन के सचिव गिरिराज खैरीवाल ने बताया कि सरकार एवं शिक्षा विभाग प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेशित होने वाले एवं अध्ययनरत विद्यार्थियों के पुनर्भरण से बचना चाहते हैं जबकि हाईकोर्ट द्वारा 8 जनवरी 2026 को दिए गए फैसले में भुगतान हेतु आदेशित किया गया है। बावजूद इसके शिक्षा विभाग एवं सरकार अभी तक हठधर्मी बने हुए हैं और भुगतान करने से बचना चाह रहे हैं। पूर्व में भी विभाग से इस संबंध में निवेदन किये जा चुके हैं लेकिन विभाग ने मौन धारण कर रखा है। इसलिए आज विभिन्न संगठनों के सामूहिक मंच प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन के बैनर तले शिक्षा विभाग को इस संबंध में अपने स्पष्ट दिशा निर्देश अधिकतम 10 दिनों में जारी करने हेतु ज्ञापन देकर चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी 10 दिनों में शिक्षा विभाग ने प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु पुनर्भरण के स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं किए तो एक भी प्राईवेट स्कूल प्री प्राईमरी कक्षाओं में किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं देंगे।

    खैरीवाल ने बताया कि इसके साथ साथ ज्ञापन में वर्तमान सत्र 2025-26 का शीघ्र भुगतान करने हेतु आग्रह करते हुए अप्रैल महीने में दोनों किश्तों का भुगतान एक साथ करने हेतु मांग की गई है। उन्होंने बताया कि सत्र 2018-19, सत्र 2019-20, सत्र 2020-21 में भुगतान हेतु लगाए गये बैरियर्स हटाकर रोका गया भुगतान तुरन्त करने की मांग की है। कोरोना के दौरान आफलाइन अध्यापन कराने वाले वाले स्कूल्स को बिना शर्त त्वरित भुगतान की मांग भी ज्ञापन में की गई है। आरटीई शुरू होने से लेकर अब तक भुगतान से वंचित या अन्य किसी तकनीकी समस्या के कारण पोर्टल पर भौतिक सत्यापन रिपोर्ट अपलोड नहीं कर सकने वाले स्कूल्स को एक अवसर और देने की मांग भी इस ज्ञापन में की गई है। लगातार पांचवें वर्ष भी यूनिट कॉस्ट में वृद्धि नहीं करने का विरोध जताते हुए यूनिट कॉस्ट को तर्कसंगत बनाने की मांग भी उल्लेखित है। खैरीवाल ने बताया कि इस अवसर पर फेडरेशन के सहसचिव लोकेश कुमार मोदी, प्रभुदयाल गहलोत, तरविन्दर सिंह कपूर, रमेश बालेचा, रघुनाथ बेनीवाल, घनश्याम साध हरिनारायण स्वामी, अभिजीत व्यास, रविकांत पुरोहित, सोमेश्वर स्वामी, रामदेव गौर, युवराज जैन, धर्मेंद्र कुमार शर्मा, उदयवीर सिंह, भरतसिंह राठौड़, पंकज गौड़, घनश्याम स्वामी, कुणाल सिंह कपूर सहित अनेक प्राईवेट स्कूल्स संचालक उपस्थित थे।

  • आरटीई की संशोधित प्रक्रिया के कारण हजारों बच्चों को प्रवेश से रहना पड़ेगा वंचित

    आवेदन में रही कमियों को दूर करने का नहीं मिलेगा अवसर

    बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत सत्र 2026-27 से कुछ संशोधन किए गये हैं। इस संबंध में विभाग ने दिशा निर्देशों में सब कुछ स्पष्ट कर दिया था। इन संशोधनों में से एक संशोधन अभिभावकों के लिए बहुत घातक साबित होना तय है। सत्र 2026-27 से रिपोर्टिंग के बाद अभिभावक किसी भी तरह का कोई दस्तावेज आनलाईन अटैच नहीं कर सकेंगे। अभी अधिकांश अभिभावक इस मुगालते में है कि वे अपूर्ण या बकाया दस्तावेज सत्यापन के समय लगने वाले आक्षेप पूर्ति के दौरान कर देंगे लेकिन ऐसा मौका इस बार मिलेगा ही नहीं। इस कारण से छोटी छोटी कमियां आवेदन निरस्त करने की बड़ी वजह बन जाएगी। क्योंकि सत्यापन के दौरान आक्षेप का विकल्प ही नहीं रखा गया है। सत्यापन की प्रक्रिया में आवेदन या तो सत्यापित होगा अथवा निरस्त होगा। विदित रहे कि 16 मार्च 2026 तक अभिभावकों को आवेदित किसी एक स्कूल में आनलाईन रिपोर्टिंग करनी थी। 17 मार्च से स्कूल्स द्वारा उन्हें प्राप्त आनलाइन रिपोर्ट का वेरीफिकेशन का काम आनलाइन ही करना है।

    अभिभावकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं आवश्यक जानकारी

    आरटीई के अंतर्गत आवेदन करने वाले अभिभावकों को इस बात का ध्यान होना चाहिए कि जब तक किसी भी विद्यालय में प्रवेश हेतु कन्फर्मेशन नहीं मिलती है तब तक उन्हें किसी भी स्कूल में मूल दस्तावेज या दस्तावेज़ों की प्रतिलिपि या आवेदन पत्र इत्यादि कुछ भी जमा नहीं कराना चाहिए। आरटीई के आवेदन के दौरान ही आवश्यक सभी दस्तावेज लगाना अनिवार्य होता है लेकिन इसके बावजूद अनेक अभिभावक ई मित्र संचालकों के कहने के अनुसार आधे अधूरे या गलत या अनावश्यक दस्तावेज आनलाइन अपलोड कर देते हैं, सत्यापन के दौरान जब संबंधित विद्यालय द्वारा आक्षेप लगाया जाता था तो भी अभिभावक ई मित्र का ही पक्ष लेते थे। इसी तरह से जब इस वर्ष भी आवेदन पत्र रिजेक्ट होंगे तो अभिभावक स्कूल्स को ही दोषी ठहराएंगे जबकि स्कूल्स यदि किसी आवेदन पत्र में रही कमियां निकालते हैं तो वो सब कुछ नियमानुसार ही करते हैं। हालांकि अनेक स्कूल्स लॉटरी निकलने से पहले ही आवेदन पत्र एवं संलग्न दस्तावेज अभिभावकों से ले लेते हैं। ऐसा करना भी नियमानुसार नहीं है। प्राथमिकता सूची में नाम आ जाना मतलब एडमिशन कन्फर्म मान लेना भी अभिभावकों की बड़ी भूल है। आरटीई के अंतर्गत प्रत्येक कार्य आनलाइन ही संभव होता है। दस्तावेज़ों का सत्यापन भी आनलाइन ही किया जाता है। प्रत्येक नियम, पूरी प्रक्रिया की जानकारी आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध रहती है जिसे कोई भी देख समझ सकते हैं लेकिन इतना कष्ट कोई करना ही नहीं चाहते।

  • 12 वीं के अलावा सभी बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम 25 मार्च से पहले जारी करने की कवायद

    12 वीं के अलावा सभी बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम 25 मार्च से पहले जारी करने की कवायद

    जल्दबाजी में किए जा रहे मूल्यांकन कार्य में लापरवाहियों की शिकायतों की भरमार

    बीकानेर। आगामी सत्र 2026 – 27 को एक अप्रैल 2026 से शुरू करने की जिद्द बोर्ड परीक्षाएं देने वाले स्टूडेंट्स के लिए नुकसान दायक भी सकती है तो परीक्षार्थियों की लॉटरी लगने जैसी भी हो सकती है। 27 फरवरी 2026 को 10 वीं बोर्ड की परीक्षाएं समाप्त हुई थी। 12 वीं बोर्ड परीक्षाएं 10 मार्च 2026 को समाप्त हुई। बोर्ड दसवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 20 मार्च तक तथा 12 वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 30 मार्च तक जारी करने में जुटा हुआ है। 20 – 22 दिन में 10 लाख से अधिक परीक्षार्थियों का परिणाम तैयार करना कोई हंसी मजाक की बात नहीं है। जल्दबाजी हमेशा ही नुकसानदायक मानी जाती है। लगातार सुनने में आ रहा है कि जल्दबाजी के कारण परीक्षा कापीज जांच का काम बहुत लापरवाही से किया जा रहा है। यह लापरवाही विद्यार्थियों के लिए लाभकारी होगी या नुकसानदायी, यह तो परिणाम जारी होने के बाद ही पता चल सकेगा लेकिन ऐसा पहली बार होगा जब स्थानीय कक्षाओं के परिणामों से पहले बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए जाएंगे। यह भी पहली दफा होगा जब दसवीं का परीक्षा परिणाम बारहवीं के परीक्षा परिणाम से पहले घोषित होगा। प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन (कक्षा – 5), प्रारंभिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण पत्र (कक्षा – 8) एवं माध्यमिक परीक्षा (कक्षा – 10) के परिणाम 25 मार्च से पहले ही जारी करने की कवायद में विभाग लगातार जुटा हुआ है। स्थानीय कक्षाओं के परिणामों के लिए पहले ही शिविरा में संशोधन करते हुए 25 मार्च की तारीख मुकर्रर की जा चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा दसवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 20 मार्च तक घोषित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं 8 एवं 5 वीं कक्षाओं के परिणाम 25 मार्च से पहले जारी किए जाने हेतु शिक्षा विभाग द्वारा भरसक कोशिश की जा रही है।

  • शिक्षक संगठनों का विरोध लाया रंग

    शिक्षक संगठनों का विरोध लाया रंग

    शिक्षकों द्वारा सिलेंडर वितरण की निगरानी का आदेश संशोधित, अब टीचर्स नहीं तहसील के कार्मिकों को करनी होगी ड्यूटी

    रावतसर के उपखंड अधिकारी द्वारा जारी आदेश की हो रही खूब चर्चा

    शिक्षक संगठनों ने जताया कड़ा एतराज, ड्यूटी हुई निरस्त

    हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ जिले के रावतसर में सिलेंडर वितरण एवं निगरानी हेतु लगाई गयी शिक्षकों की ड्यूटी हटा दी गई है। अब टीचर्स के बजाय तहसील कार्यालय के कार्मिकों को ड्यूटी पर लगाया गया है। दो दिन पहले एक आदेश सामने आया था जिसने शिक्षा जगत में हलचल मचा दी। दरअसल सिलेंडर आपूर्तिकर्ताओं द्वारा की जा रही मनमर्जी को नियंत्रित करने के लिए हनुमानगढ़ जिले के रावतसर में प्रशासन ने तहसील कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाकर 3 टीचर्स की ड्यूटी 14 मार्च से आगामी आदेश तक लगा दी थी। गैर शैक्षणिक कार्य के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के इस स्थानीय प्रशासनिक आदेश की चारों तरफ खूब चर्चा हुई। उपखंड अधिकारी के इस आदेश को अव्यवहारिक बताते हुए शिक्षक संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए भारी विरोध प्रकट किया। मजबूर होकर प्रशासन ने आज संशोधित आदेश जारी कर दिया तथा टीचर्स की बजाय तहसील के ही तीन कार्मिकों की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर 24 घंटे लगा दी है।

  • पी एम मोदी की मिमिक्री शिक्षक को पड़ी महंगी, मिला निलंबन

    पी एम मोदी की मिमिक्री शिक्षक को पड़ी महंगी, मिला निलंबन

    शिवपुरी। गैस के बढ़े दामों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करते हुए उन पर कटाक्ष करना एक प्राथमिक शिक्षक को भारी पड़ गया है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उस शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। शिक्षक की पहचान साकेत पुरोहित के रूप में हुई है, जो कि पोहरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय आदिवासी मोहल्ला सेमरखेडी में पदस्थ है।

    शिक्षक के विरुद्ध यह कार्रवाई पिछोर क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी द्वारा की गई शिकायत के बाद हुई है। विधायक द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी से की गई शिकायत में शिक्षक पर जनप्रतिनिधि की मिमिक्री करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। विधायक ने कहा कि इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है और साथ ही यह शासकीय सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन भी है। जिसके बाद उनकी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षक अधिकारी ने पुरोहित को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान साकेत पुरोहित का मुख्यालय विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बदरवास तय किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमों के अनुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही दिया जाएगा।

    क्या कहा था निलंबित शिक्षक ने

    निलंबित शिक्षक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करते हुए जो वीडियो बनाया था, उसमें उसने पीएम के बोलने के अंदाज में कहा था- ‘मेरे प्यारे भाइयों-बहनों, गैस के दाम कम हुए कि नहीं हुए? नहीं हुए। और गैस के दाम बढ़े कि नहीं बढ़े? बढ़ गए। तो गैस के दाम इसलिए बढ़ गए कि भाइयों-बहनों, गैस की रोटी खाने से पेट में भी गैस बनती है, और अगर पेट में गैस बनेगी तो आप बीमार पड़ जाओगे। और अगर आप बीमार पड़ोगे तो यह देश बीमार पड़ जाएगा! मेरे भाइयों-बहनों। इसलिए गैस के दाम बढ़ने से आम आदमी भी रोटी खाएगा चूल्हे की और अमीर आदमी भी खाएगा चूल्हे की रोटी। जो अमीर आदमी और आम आदमी के बीच में जो अमीरी-गरीबी की खाई है भाइयों-बहनों, वो दूर हो जाएगी। धन्यवाद भाइयों और बहनों।’

    अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश उचित नहीं : नेता प्रतिपक्ष

    उधर राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे को उठाया और शिक्षक को निलंबित किए जाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘शिवपुरी में प्रधानमंत्री की मिमिक्री के आरोप में एक शिक्षक को निलंबित करना बेहद चिंताजनक है। क्या अब लोकतंत्र में सवाल पूछना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी अपराध बन गया है?’ उन्होंने कहा, ‘जब प्रदेश की जनता महंगी गैस, पेट्रोल-डीजल और बढ़ती महंगाई से परेशान है, तब जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय एक शिक्षक को सस्पेंड करना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। साथ ही बड़ा सवाल यह है कि आज प्रदेश के युवाओं और कर्मचारियों के साथ जो हो रहा है, क्या यह एक बड़ी मिमिक्री नहीं है?

  • आरटीई के भुगतान को लेकर अनेक राज्यों में आक्रोश, असहयोग आन्दोलन की घोषणा

    आरटीई के भुगतान को लेकर अनेक राज्यों में आक्रोश, असहयोग आन्दोलन की घोषणा

    बीकानेर। आरटीई की प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं का आक्रोश खुलकर सामने आना शुरू हो गया है। राजस्थान सहित अनेक राज्यों में असहयोग आन्दोलन शुरू होने की जानकारी सामने आई है। पिछले दिनों जयपुर में स्कूल क्रांति संघ एवं निसा की बैठक में इस संबंध में गंभीर मंथन हो चुका है। स्कूल क्रांति संघ द्वारा “भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं” अभियान पूरे राजस्थान में चलाने के प्रयास शुरू किए जा चुके हैं। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 1 मार्च 2026 को आयोजित बैठक में असहयोग आंदोलन का ऐलान कर दिया है। बैठक में सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षा के अधिकार कानून के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाता तब तक प्रदेश के समस्त स्कूल असहयोग आंदोलन करेंगे। असहयोग आंदोलन में स्कूल शिक्षा विभाग के किसी भी कार्य में प्रदेश के निजी स्कूल सहयोग नहीं करेंगे। इसमें स्कूल किसी पत्र, नोटिस, आदेश का जवाब तक नहीं देंगे।

    एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि आरटीई के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि पिछले 13 वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है। एसोसिएशन द्वारा इस मुद्दे पर शिक्षा विभाग के विरुद्ध उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की गई थी। याचिका के आदेश में उच्च न्यायालय ने अपने अंतिम आदेश में 6 माह के भीतर मांगों पर निर्णय लेने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत खेद का विषय है की गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले व्यय पर स्कूल शिक्षा विभाग संवेदनहीन है और कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी कर रहा है।

    संगठन ने खुल्लमखुल्ला घोषणा कर दी है कि प्रतिपूर्ति राशि जब तक अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ेगी तब तक आन्दोलन जारी रहेगा। संगठन ने पुरजोर मांग की है कि कोर्ट के निर्देशों की पालना करते हुए शिक्षा विभाग को तुरन्त प्रभाव से प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान बढी हुई राशि के अनुसार पिछले 3 वर्षों का करना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि आरटीई के तहत प्रदाय की जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि प्रति विद्यार्थी / प्रति वर्ष प्राथमिक कक्षाओं में 7000 से बढा़कर 18000, माध्यमिक की 11,500 से बढ़ाकर 22,000 एवम हाई और हायर सेकंडरी की अधिकतम सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 तक किया जाए।

  • आरटीई के अंतर्गत अपने बच्चे का आवेदन करने वाले अभिभावकों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है

    आरटीई के अंतर्गत अपने बच्चे का आवेदन करने वाले अभिभावकों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है

    दुगुनी फीस के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है…

    बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत सत्र 2026-27 के लिए जारी दिशा निर्देशों में कई नए प्रावधान लागू किए गए हैं। यह जानकारी आरटीई के अंतर्गत आवेदन करने वाले अभिभावकों को होनी आवश्यक है। गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों के अभिभावकों के विरूद्ध कार्रवाई करने का प्रावधान इस वर्ष से लागू हो गया है। इस वर्ष से पेन नंबर का विकल्प भी आवेदन पत्र के साथ जोड़ दिया गया है। दोनों ही प्रावधानों के लिए पैपा (प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस, राजस्थान) द्वारा गत 10-12 वर्षों से मांग की जा रही थी। अनेक अवसरों पर इस तरह के सुझाव भी पैपा द्वारा दिए जाते रहे हैं। पैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने इन प्रावधानों को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग का आभार व्यक्त किया है तथा पेन नंबर की अनिवार्यता हेतु अपनी मांग भी प्रस्तुत की है।

    यह प्रावधान किया है लागू

    यदि किसी अभिभावक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज या जानकारी गलत या मिथ्या सिद्ध हो जाती है तो ऐसे अभिभावकों को संबंधित विद्यालय में उस विद्यालय द्वारा निर्धारित फीस का दुगुनी राशि चुकानी होगी तथा साथ ही स्कूल ऐसे अभिभावकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए भी स्वतंत्र रहेगा। शिक्षा विभाग ने यह प्रावधान आरटीई के अंतर्गत जारी किए जाने वाले दिशा निर्देशों में जोड़ा है। सत्र 2026-27 हेतु जारी दिशा निर्देशों में पृष्ठ संख्या 8 पर बिन्दु संख्या 4.13 में इस प्रावधान को देखा जा सकता है।
    वास्तविक आय से कम आय का प्रमाण – पत्र, गलत वार्ड, पंचायत या एड्रेस इत्यादि के आधार पर आरटीई के अंतर्गत हर वर्ष शिक्षा विभाग में सैंकड़ों शिकायतें मिलती रहती है लेकिन कोई ठोस प्रावधान नहीं होने के कारण विभाग ऐसे अभिभावकों के विरुद्ध कोई विशेष कार्रवाई नहीं कर सका। अब यह प्रावधान लागू हो जाने से ऐसे अभिभावकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो सकेगी। विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि विभाग द्वारा इस संबंध में इस वर्ष से पूरी मुस्तैदी के साथ निगरानी की जाएगी तथा हर ब्लाक्स के लिए टार्गेट निर्धारित करने की तैयारी की जा रही है।

  • आरटीई के अंतर्गत प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु शिक्षा विभाग द्वारा भुगतान नहीं करने की मंशा हुई उजागर

    आरटीई के अंतर्गत प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु शिक्षा विभाग द्वारा भुगतान नहीं करने की मंशा हुई उजागर

    प्री प्राईमरी की तीनों कक्षाओं में प्रवेश की योजना कोर्ट के निर्देशों की अवमानना : सुश्री शर्मा

    बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत सत्र 2026-27 से पहली कक्षा के साथ साथ सभी प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेश की प्रक्रिया शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है लेकिन प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेशित होने वाले स्टूडेंट्स की फीस के भुगतान को लेकर शिक्षा विभाग ने मौन साध लिया है। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि इन कक्षाओं में प्रवेशित होने वाले स्टूडेंट्स की फीस का भुगतान किया जाएगा या नहीं। सिंगल बैंच के फैसले को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा प्री प्राईमरी की सभी कक्षाओं में प्रवेश देने हेतु निर्देशित किया गया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा जारी फैसले में प्री प्राईमरी कक्षाओं हेतु भुगतान संबंधित कोई जिक्र नहीं किए जाने की बात शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा कही जा रही है जबकि फैसले के बिन्दु क्रमांक 38 में बताया गया है कि समाज के वंचित और कमजोर वर्गों से आने वाले 25% छात्रों को गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश देने की शिक्षा विभाग अनुमति देगा और ऐसे स्कूल्स को शिक्षा देने के लिए उसी सीमा तक अनुदान (ग्रांट-इन-एड) भी देगा। साथ ही शिक्षा विभाग यह भी भूल रहा है कि सिंगल बैंच के फैसले में प्री प्राईमरी कक्षाओं के लिए भुगतान हेतु स्पष्ट निर्देश दिए गए थे और डबल बैंच द्वारा जारी फैसले में सिंगल बैंच के फैसले को सही बताते हुए ही निर्देश दिए गए हैं। उधर प्राईवेट स्कूल्स के संगठनों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। स्कूल क्रांति संघ की प्रदेश अध्यक्ष हेमलता शर्मा ने प्रेस बयान रिलीज कर चेतावनी दी है कि जब तक पिछला बकाया भुगतान शिक्षा विभाग द्वारा नहीं किया जाता है तब तक आरटीई के अंतर्गत प्रवेश नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के फैसले की अवहेलना विभाग द्वारा की जा रही है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने केवल पी पी 3 एवं पहली कक्षा के लिए ही निर्देशित किया है जबकि विभाग पी पी 3, पी पी 4, पी पी 5 एवं पहली कक्षा में प्रवेश की विज्ञप्ति जारी कर खुल्लमखुल्ला हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर रहा है।

    क्या कहता है हाईकोर्ट का फैसला

    4 नवंबर 2025 को हुई फाईनल सुनवाई के पश्चात 8 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट, जयपुर की डबल बेंच द्वारा सुनाए गये निर्णय का अध्ययन करने से सामने आया कि हाईकोर्ट द्वारा जारी फैसले में स्पष्ट रूप से सभी प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेश देने हेतु कहा गया है। न्यायाधीश बलजिन्द्र सिंह संधू एवं संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा सुनाए गये फैसले में कहा गया है कि यदि पहली कक्षा में ही आरटीई के अंतर्गत प्रवेश का प्रावधान होगा तो गरीब तबके के बच्चे शिक्षा में पिछड़ जाएंगे क्योंकि नोन आरटीई के अंतर्गत पढ़ने वाले स्टूडेंट्स प्री प्राईमरी कक्षाओं को पढ़कर पहली में आएंगे जबकि आरटीई के अंतर्गत जरूरी नहीं है कि सभी बच्चों द्वारा प्री प्राईमरी की पढाई की जाए। इसलिए हाईकोर्ट ने सभी प्री प्राईमरी कक्षाओं में आरटीई के अंतर्गत प्रवेश हेतु फैसला दिया है। हालांकि शिक्षा विभाग की तरफ से पैरवी करने वाले विद्वान अधिवक्ताओं ने कहा था कि विभाग द्वारा कक्षा 1 से ही मान्यता दी जाती है, इसलिए केवल कक्षा – 1 में ही आरटीई के अंतर्गत प्रवेश की व्यवस्था लागू की जानी उचित रहेगी। डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि कमज़ोर तबके और पिछड़े ग्रुप के बच्चों को प्री प्राइमरी एजुकेशन से दूर नहीं किया जाना चाहिए। यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि जैसे-जैसे देश तरक्की कर रहा है, बच्चों का IQ लेवल बढ़ा है और अगर बच्चों को प्री प्राइमरी स्टेज पर सीखने से दूर रखा जाता है, तो वे अच्छी तरह से बने-बनाए ऊँचे समाज के बच्चों से पीछे रह सकते हैं। RTE एक्ट का मकसद ही खत्म हो जाएगा, अगर कमज़ोर तबके और पिछड़े ग्रुप के स्टूडेंट्स को सिर्फ़ क्लास-I लेवल पर एडमिशन दिया जाता है, क्योंकि प्री प्राइमरी क्लास में पहले से पढ़ चुके दूसरे बच्चों के मुकाबले उनकी हालत खराब होती है।