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शिक्षा विभाग में आमूलचूल बदलाव की तैयारी शुरू, निजी विद्यालयों को कैसे मैनेज करेगी नयी सरकार

2020
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निजी स्कूल्स की प्रार्थना और ड्रेस-कोड में कैसे एकरूपता ला पाएगी सरकार !

हरीश बी. शर्मा

(ख्यातनाम वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार)

राजस्थान की भाजपा सरकार ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में एकरूपता लाने की दृष्टि से बदलाव शुरू कर दिया है। 4 दिन पहले विधायक बाल मुकुंदाचार्य ने जिस तरह स्कूल की ड्रेस में एकरूपता की बात कही थी, उसी वक्त यह संकेत मिल गया था कि भाजपा की आगामी कार्ययोजना में अब शिक्षा-जगह आएगा। हालांकि, इस तरह की भनक लगते ही कि स्कूलों में हिजाब पहनकर जाने का विरोध हो रहा है, प्रदर्शन भी हुए। स्कूलों में लड़कियां पहुंची भी नहीं, लेकिन जिस तरह के तेवर भाजपा की सरकार के हैं और बतौर शिक्षा मंत्री भी मदन दिलावर जैसे तेज-तर्रार नेता मिले हैं, इस बात में कोई संशय नहीं है कि आने वाले कुछ ही दिनों में शिक्षा विभाग में आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिलेगा। देखना यह है कि मदल दिलावर इन नियमों को निजी स्कूल्स पर कैसे लागू करवा पाते हैं, क्योंकि निजी स्कूल्स में ड्रेस-कोड से लेकर प्रार्थनाएं तक मनमर्जी की चलती है।शिक्षा विभाग ने स्कूल्स के लिए चार नियम बनाए हैं। इन नियमों में एक जैसा ड्रेस-कोड होगा। चयनित प्रार्थनाएं होंगी। प्रार्थना के समय सरस्वती माता की तस्वीर होनी जरूरी होगी और जिन महापुरुषों का जिक्र पाठ्यक्रमों में होगा, उन्हें ही पढ़ाया जा सकेगा। इन नियमों के साथ ही प्रदेश की स्कूलों में खलबली मचनी तय है। खासतौर से प्राइवेट स्कूल्स मेंं, जहां ड्रेस-कोड प्रबंधन की इच्छा के अनुसार चलता है, क्या प्रदेश की सभी स्कूल्स में एक जैसा ड्रेस कोड लागू करवाने में अधिकारी सख्त हो पाएंगे, क्योंकि यह जिम्मेदारी अधिकारियों की ही होगी कि वे इन सभी नियमों पर निगरानी करे।चयनित प्रार्थनाओं वाला मामला भी सरकार को बारीकी से देखना होगा। प्रदेश में ऐसी कई स्कूल्स हैं, जिनका संचालन समाज, धर्म या संप्रदाय पर आधारित भी है, वहां पर या तो चयनित प्रार्थनाएं होती ही नहीं हैं या फिर समानांतर प्रार्थना करवाई जाती है। यह तो जांच में ही पता चल पाएगा कि उन स्कूल्स में क्या स्थिति है।रही बात सरस्वती की तस्वीर की अथवा पाठ्यक्रम में उल्लेखित महापुरुषों के संबंध में ही अध्ययन कराने की, ये तो आसानी से लागू हो जाएंगे, लेकिन ड्रेस-कोड और प्रार्थनाओं के लिए सरकार को बड़े स्तर पर काम करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो अवहेलना होने लगेगी। सरकार को चाहिए कि इन सभी नियमों की पालना के लिए निजी स्कूल्स की काउंसिलिंग करे और उन्हें एक-रूपता के फायदे बताए। यह सही है कि अगर प्रदेश की सभी स्कूल्स में एक जैसा ड्रेस-कोड होगा तो बच्चों के अंदर हीनता का भाव नहीं आएगा वरना बहुत सारे सरकारी स्कूल्स में पढने वाले बच्चे तो इसी सोच में अपने आपको कमतर आंकने लगते हैं कि दूसरी ड्रेस वाले बच्चों से वे कमतर हैं। इस कमतरी के अहसास को खत्म करवाने के लिए एक जैसी ड्रेस कोड का विचार अच्छा है। हालांकि, भाजपा इस मुद्दे पर लगातार काम कर रही है। जैसे वन नेशन, वन इलेक्शन, वन नेशन, वन राशन कार्ड आदि। ऐसे में स्कूल्स में भी अगर एकरूपता आएगी तो बच्चों के समन्वित विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।देखना यह है कि निजी स्कूल्स में यह नियम कैसे लागू होता है? जाहिराना तौर पर सरकार, मंत्री और शिक्षा विभागीय अधिकारियों को अधिक समर्पित, नैतिक और निष्ठावान होना होगा तब ही ये चार नियम स्कूल्स में लागू हो पाएंगे।

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यह आर्टिकल हरीश बी. शर्मा ने लॉयन एक्सप्रेस पोर्टल पर एक फरवरी 2024 को अपने नियमित संपादकीय कॉलम “हस्तक्षेप” में पब्लिश किया था। विशेष अनुरोध पर ज्ञानायाम में भी प्रकाशित करने की अनुमति देने के लिए ज्ञानायाम उनके प्रति कृतज्ञ है।

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