यूनिट कॉस्ट नहीं बढाने को लेकर प्राईवेट स्कूल्स के संगठनों का भारी रोष कभी भी ले सकता है आंदोलन का रूप

ज्ञानायाम में प्रकाशित जानकारी के बाद एक्शन में आए विभिन्न संगठन

बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत सत्र 2023-24 में भी यूनिट कॉस्ट में वृद्धि नहीं करने से गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने रोष जताया है। प्राईवेट स्कूल्स के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि सरकार की दमनकारी नीतियों का डटकर मुकाबला किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि ज्ञानायाम ने पिछले सप्ताह ही इस संबंध में खुलासा करते हुए बताया था कि लगातार दूसरे वर्ष भी आरटीई की यूनिट कॉस्ट में वृद्धि नहीं की गई है। ज्ञानायाम के माध्यम से जैसे ही यह जानकारी सामने आई प्राईवेट स्कूल्स के विभिन्न संगठनों के मुखियाओं के विरोध के स्वर बुलंद होने लगे। राजसमंद के शिक्षाकुल संगठन के डॉ. महेंद्र कर्णावट ने कहा कि सरकारी तंत्र द्वारा प्राईवेट स्कूल्स के साथ इस तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए और महंगाई दर के मुताबिक न्यूनतम वृद्धि यूनिट कॉस्ट में होनी ही चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शीघ्र ही प्रदेश स्तर पर विभिन्न संगठनों के साथ योजना बनाकर संघर्ष शुरू किया जाएगा।

स्कूल क्रांति संघ, राजस्थान, जयपुर की प्रदेश अध्यक्ष सुश्री हेमलता शर्मा ने कहा कि आरटीई के अंतर्गत नियमानुसार भुगतान नहीं करने, यूनिट कॉस्ट में बढ़ोतरी नहीं करने, मनमाने तरीके से आरटीई के नाम पर प्राईवेट स्कूल्स का दमन करने इत्यादि सहित अनेक बिंदुओं को लेकर हमने न्यायालय की शरण में जाना तय किया है। आरटीई के अंतर्गत प्री प्राईमरी कक्षाओं में प्रवेश देने की प्रक्रिया को भी हमारे द्वारा न्यायालय में चैलेंज किया हुआ है, जिसके अंतर्गत सरकार को भुगतान करने के अंतरिम आदेश न्यायालय ने दे रखे हैं। इसी तरह से सत्र 2020-21 के अंतर्गत आफलाइन तरीके से शिक्षण कार्य कराने वाले स्कूल्स के लिए भी कोर्ट में केस लंबित चल रहा है। सुश्री शर्मा ने कहा कि आरटीई के अंतर्गत भुगतान संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए उनके संगठन द्वारा बड़े आंदोलन की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के अंतरिम आदेश के बावजूद भी प्री प्राईमरी कक्षाओं के स्टूडेंट्स को भुगतान प्रक्रिया में शामिल नहीं करने का भी समुचित विरोध किया जाएगा। रिकॉक्नाइज्ड स्कूल एसोसिएशन, राजस्थान, कोटा के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट संजय शर्मा ने कहा कि यूनिट कॉस्ट में वृद्धि नहीं करना, शिक्षा विभाग और सरकार की प्राईवेट स्कूल्स के विरुद्ध दमनकारी नीति है। ऐसा होने से प्राईवेट स्कूल्स आरटीई के अंतर्गत प्रवेश नहीं देने के रास्ते निकालेंगे, जिससे गरीब विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा से वंचित होना पड़ सकता है। श्री शर्मा ने कहा कि उनका संगठन इस विषय में शीघ्र ही शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर प्राईवेट स्कूल्स की वास्तविक पीड़ाओं के निराकरण की मांग करेंगे। स्वराज के प्रदेश महासचिव प्रो. मुकेश मांडन, जोधपुर का मानना है कि सरकार को प्राईवेट स्कूल्स के सामाजिक योगदान को मद्देनजर रखते हुए इनके अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए न कि इन्हें पीड़ा पहुंचाने के रास्ते निकालकर इन पर दादागिरी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अतिशीघ्र सरकार के साथ इस विषय में संगठन स्तर पर वार्ता की जाएगी।

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