
बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत अध्ययनरत स्टूडेंट्स की सत्र 2025-26 की यूनिट कॉस्ट के निर्धारित होते ही इस विषय में जारी सारे कन्फ्यूजन भी दूर हो गये हैं। लगातार पांचवें वर्ष भी यूनिट कॉस्ट में किसी भी तरह की वृद्धि नहीं की गयी है। पिछले सालों की तरह इस वर्ष भी 13535/- प्रति विद्यार्थी यूनिट कॉस्ट निर्धारित की गई है। पुस्तकों के लिए 202/- प्रति विद्यार्थी डीबीटी द्वारा उनके जनाधार अकाउंट में डिपोजिट किए जाएंगे। हालांकि पिछले साल भी जब यूनिट कॉस्ट में वृद्धि नहीं की गयी थी तो प्राईवेट स्कूल्स के विभिन्न संगठनों ने सरकार एवं शिक्षा विभाग से मिलकर यूनिट कॉस्ट में वृद्धि की खूब पैरवी की थी। उस वक्त अनेक संगठनों ने दावा किया था कि अगले वर्ष यूनिट कॉस्ट में वृद्धि का पूरा भरोसा सरकार एवं शिक्षा विभाग ने दिया है।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग ने पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी यूनिट कॉस्ट में वृद्धि करने का प्रस्ताव भिजवाया था जो कि 34 हजार रुपये से अधिक था। बाद में कम करने के फिल्टर लगाकर विभाग द्वारा लगभग 24 हजार से अधिक की राशि यूनिट कॉस्ट हेतु तय कर प्रस्तावित की थी लेकिन वित विभाग एवं सरकार द्वारा गत चार वर्षों की तरह यूनिट कॉस्ट में वृद्धि करना उचित नहीं समझा और पांचवें वर्ष भी यूनिट कॉस्ट में वृद्धि नहीं की है। प्राईवेट स्कूल्स फेडरेशन की अध्यक्ष हेमलता शर्मा एवं सचिव गिरिराज खैरीवाल ने सरकार की इस हिटलर शाही का विरोध करते हुए कहा कि क्या 4 वर्षों में महंगाई नहीं बढी? क्या चार वर्षों में किसी भी सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारी के वेतन में वृद्धि नहीं हुई? तो फिर यह मनमानी क्यों? उन्होंने कहा कि अब कोर्ट के अलावा कोई रास्ता उनके पास नहीं बचा है। विद्वान विधिवेत्ताओं से शीघ्र ही सलाह मशविरा कर सरकार की मनमानी को विधि सम्मत तरीके से न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।








युनिट कास्ट तो बढनी चाहिए 5वर्ष में नहीं बढी तो आगे भी नही बढ़ाएंगे इस के लिए सभी संगठन एक साथ हो कर विरोध दर्ज कराये तो बेहतर होगा